उत्तराखंड में मदरसा बोर्ड होगा खत्म: 30 मदरसों में एक भी छात्र नहीं

30 मदरसों में एक भी छात्र नहीं
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Nidhi kumari

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उत्तराखंड सरकार ने राज्य की मदरसा शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव करने का फैसला लिया है। मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami ने घोषणा की है कि जुलाई 2026 से उत्तराखंड मदरसा शिक्षा परिषद को समाप्त कर दिया जाएगा। इसके स्थान पर उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का गठन किया जाएगा, जिसका उद्देश्य मदरसों को मुख्यधारा की शिक्षा प्रणाली से जोड़ना और आधुनिक शिक्षा को बढ़ावा देना है।

सरकार का कहना है कि अब राज्य के सभी मदरसों में उत्तराखंड विद्यालय शिक्षा बोर्ड का पाठ्यक्रम लागू किया जाएगा ताकि छात्रों को प्रतिस्पर्धात्मक शिक्षा मिल सके और वे रोजगार व उच्च शिक्षा के बेहतर अवसर हासिल कर सकें।

 

54 में से 30 मदरसों में नहीं है एक भी छात्र

राज्य में कुल 452 मदरसे संचालित हैं, जिनमें से 54 मदरसों को कक्षा 9 से 12 तक की मान्यता प्राप्त है। लेकिन हालिया आंकड़ों ने मदरसा शिक्षा की स्थिति को बेहद चिंताजनक बताया है। शैक्षिक सत्र 2025-26 में इन 54 मान्यता प्राप्त मदरसों में से केवल 24 में ही छात्रों का पंजीकरण हुआ है, जबकि 30 मदरसे पूरी तरह छात्रविहीन पाए गए हैं।

मुंशी (हाईस्कूल) और आलिम (इंटरमीडिएट) स्तर पर छात्रों की संख्या लगातार घट रही है। आलिम स्तर पर पूरे प्रदेश में केवल 83 नियमित छात्र अध्ययन कर रहे हैं, जबकि 16 छात्रों ने निजी परीक्षार्थी के रूप में परीक्षा दी है।

 

 

अभिभावकों और छात्रों में असमंजस

लंढौरा स्थित मदरसा आईशा सिद्दीका के प्रबंधक अब्दुस्लाम के अनुसार, मदरसा बोर्ड समाप्त होने की खबर के बाद छात्रों और अभिभावकों में भविष्य को लेकर असमंजस की स्थिति बन गई है। कई अभिभावकों को यह डर सता रहा है कि नए सिस्टम में बच्चों की पढ़ाई, परीक्षा और प्रमाणपत्रों का क्या होगा।

इसी कारण इस सत्र में मुंशी और आलिम स्तर पर नए दाखिलों में भारी गिरावट दर्ज की गई है।

 

कई मदरसों की मान्यता पर मंडरा रहा खतरा

कम छात्र संख्या के कारण कई मदरसों की मान्यता भी खतरे में पड़ गई है। नियमों के अनुसार मुंशी और मौलवी स्तर पर कम से कम 30 छात्रों का होना जरूरी है, जबकि उच्च कक्षाओं के लिए न्यूनतम 10 छात्रों का परीक्षा में शामिल होना अनिवार्य है।

अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के अध्यक्ष डॉ. सुरजीत सिंह गांधी के मुताबिक, वर्तमान समय में 54 में से केवल 9 मदरसे ही इन मानकों को पूरा कर पा रहे हैं।

 

1 अप्रैल से शुरू होगा नया शैक्षणिक सत्र

राज्य में 1 अप्रैल से नया शैक्षणिक सत्र 2026-27 शुरू होने जा रहा है, लेकिन अभी तक किसी भी मदरसे को उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद से संबद्धता नहीं मिल सकी है। इससे छात्रों के कोर्स, परीक्षा और मान्यता को लेकर चिंता बढ़ गई है।

सरकार का कहना है कि जल्द ही मदरसों को विद्यालयी शिक्षा परिषद से जोड़ने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

 

क्या बोले सीएम पुष्कर सिंह धामी?

मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami ने कहा कि सरकार का लक्ष्य बच्चों को आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अब राज्य में अलग मदरसा पाठ्यक्रम नहीं चलेगा और सभी शिक्षण संस्थानों को एक समान शैक्षणिक ढांचे के तहत लाया जाएगा।

उन्होंने कहा कि धार्मिक शिक्षा के साथ-साथ आधुनिक विषयों को भी पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा ताकि छात्र भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार हो सकें।

 

शिक्षा सुधार या नई चुनौती?

उत्तराखंड में मदरसा बोर्ड खत्म करने का फैसला राज्य की शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव माना जा रहा है। सरकार इसे शिक्षा सुधार और मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम बता रही है, जबकि दूसरी ओर कई मदरसा संचालक और अभिभावक इसे लेकर असमंजस और चिंता जता रहे हैं।

अब आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि नई व्यवस्था मदरसा छात्रों के लिए कितनी प्रभावी साबित होती है और क्या वास्तव में इससे शिक्षा की गुणवत्ता और छात्र संख्या में सुधार हो पाता है।

 

 

 

 

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