
अस्सी घाट, काशी काशी के अस्सी घाट पर गंगा स्नान, तर्पण और पितृ स्मरण की धार्मिक परंपरा जुड़ी रही है। पितृ पक्ष में श्रद्धालु गंगा तट पर पूर्वजों को जल अर्पित कर श्रद्धा व्यक्त करते हैं।

त्रिवेणी संगम, प्रयागराज प्रयागराज का त्रिवेणी संगम गंगा, यमुना और सरस्वती के पौराणिक संगम के रूप में प्रसिद्ध है। यहां पितृ पक्ष के दौरान श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान के माध्यम से पूर्वजों का स्मरण किया जाता है।

विश्राम घाट, मथुरा मथुरा का विश्राम घाट यमुना नदी के किनारे स्थित प्रमुख तीर्थ है, जहां पितृ तर्पण और पिंडदान की परंपरा भी मिलती है। पितृ पक्ष में श्रद्धालु यमुना जल से पूर्वजों के लिए तर्पण करते हैं।

स्वर्गद्वार घाट, पुरी पुरी का स्वर्गद्वार समुद्र तट पर स्थित महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है और इसका संबंध अंतिम संस्कार एवं पितृ कर्म की परंपराओं से भी है। यहां पितरों की स्मृति में तर्पण और अन्य धार्मिक कर्म किए जाते हैं।

शिप्रा नदी घाट, उज्जैन उज्जैन की पवित्र शिप्रा नदी के घाटों पर स्नान, तर्पण और श्राद्ध कर्म की परंपरा रही है। पितृ पक्ष में श्रद्धालु शिप्रा के जल से अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करते हैं।

ब्रह्म सरोवर, कुरुक्षेत्र कुरुक्षेत्र का ब्रह्म सरोवर धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण तीर्थ माना जाता है। यहां पवित्र स्नान और पितृ कर्म से जुड़ी परंपराओं के कारण पितृ पक्ष में श्रद्धालुओं की आस्था विशेष रूप से दिखाई देती है।

श्री रंगनाथस्वामी तीर्थ, श्रीरंगपट्टनम श्रीरंगपट्टनम का श्री रंगनाथस्वामी तीर्थ कावेरी नदी क्षेत्र की महत्वपूर्ण वैष्णव परंपरा से जुड़ा है। यहां धार्मिक परंपराओं में पूर्वजों के स्मरण, तर्पण और श्राद्ध कर्म का भी स्थान माना जाता है।

सरयू घाट, अयोध्या अयोध्या में सरयू नदी के घाट पवित्र स्नान और धार्मिक अनुष्ठानों के प्रमुख केंद्र हैं। पितृ पक्ष में सरयू जल से तर्पण और पिंडदान कर पूर्वजों के प्रति श्रद्धा अर्पित करने की परंपरा मिलती है।

बिंदु सरोवर, सिद्धपुर गुजरात के सिद्धपुर स्थित बिंदु सरोवर को पितृ कर्म से जुड़े प्रमुख तीर्थों में माना जाता है। विशेष रूप से मातृ पक्ष के श्राद्ध और मातृ स्मरण से इसकी धार्मिक पहचान जुड़ी हुई है।

कोटि तीर्थ, गोकर्ण कर्नाटक के गोकर्ण में कोटि तीर्थ पर पिंडदान, तर्पण और श्राद्ध कर्म की परंपरा है। पितृ पक्ष में श्रद्धालु यहां पूर्वजों के लिए पिंड अर्पित कर उनकी शांति की कामना करते हैं।

अग्नि तीर्थम्, रामेश्वरम रामेश्वरम का अग्नि तीर्थम् समुद्र तट पर स्थित प्रमुख धार्मिक स्थल है। यहां पितृ तर्पण, श्राद्ध और पिंडदान की परंपरा जुड़ी है तथा धार्मिक मान्यताओं में भगवान राम द्वारा पूर्वजों के लिए कर्म किए जाने की कथा भी प्रचलित है।

गंगा घाट, हरिद्वार हरिद्वार में गंगा के विभिन्न घाटों पर तर्पण और पितृ कर्म की लंबी धार्मिक परंपरा है। पितृ पक्ष के दौरान श्रद्धालु गंगा जल में तर्पण कर अपने दिवंगत पूर्वजों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।

पुष्कर सरोवर, राजस्थान राजस्थान का पुष्कर सरोवर प्रमुख तीर्थों में शामिल है और यहां श्राद्ध तथा पितृ तर्पण की परंपरा भी प्रचलित है। पितृ पक्ष में श्रद्धालु पवित्र सरोवर के किनारे पूर्वजों का स्मरण करते हैं।

नर्मदा घाट, नर्मदापुरम नर्मदापुरम में मां नर्मदा के घाट धार्मिक स्नान और तर्पण के लिए महत्वपूर्ण माने जाते हैं। पितृ पक्ष में श्रद्धालु नर्मदा जल अर्पित कर पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करते हैं।

नासिक के घाट, महाराष्ट्र नासिक में गोदावरी नदी के रामकुंड सहित कई घाट पितृ कर्म की परंपरा से जुड़े हैं। यहां श्राद्ध, तर्पण और त्रिपिंडी जैसे कर्मों के माध्यम से पूर्वजों का स्मरण किया जाता है।

धर्मारण्य वेदी, गया गया की धर्मारण्य वेदी पितृ कर्म और पिंडदान की परंपरा में महत्वपूर्ण स्थान रखती है। यहां पिंडदान, श्राद्ध और त्रिपिंडी श्राद्ध जैसे कर्म पूर्वजों की शांति और स्मरण के लिए किए जाते हैं।

पितृ पक्ष का मूल संदेश भारत के अलग-अलग तीर्थों की परंपराएं और धार्मिक कथाएं भले ही अलग हों, लेकिन पितृ पक्ष का मूल भाव पूर्वजों का स्मरण, सम्मान और उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना है। श्रद्धालु अपनी पारिवारिक परंपरा और स्थानीय मान्यताओं के अनुसार श्राद्ध, तर्पण, पिंडदान और दान-पुण्य करते हैं।