मिडिल ईस्ट में बढ़ा युद्ध का खतरा: सैटेलाइट तस्वीरों से बड़ा खुलासा

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सैटेलाइट तस्वीरों से बड़ा खुलासा

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मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव ने अब एक नए और खतरनाक मोड़ ले लिया है। हालिया सैटेलाइट तस्वीरों और अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों से यह संकेत मिला है कि ईरान ने संयुक्त अरब अमीरात (UAE), जॉर्डन और कतर में मौजूद अमेरिकी निर्मित उन्नत रडार और मिसाइल डिफेंस सिस्टम को निशाना बनाया है।
इन हमलों के कारण क्षेत्र की एयर डिफेंस क्षमताओं को गंभीर नुकसान पहुंचा है और इससे पूरे खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ये दावे सही साबित होते हैं, तो यह अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के लिए एक बड़ा रणनीतिक झटका हो सकता है।

जॉर्डन में THAAD रडार सिस्टम पर हमला
नई सैटेलाइट तस्वीरों से पता चलता है कि जॉर्डन के मुवफ्फाक साल्टी एयर बेस पर तैनात अमेरिकी THAAD मिसाइल बैटरी के रडार सिस्टम को गंभीर नुकसान पहुंचा है।
बताया जा रहा है कि ईरान ने संघर्ष के शुरुआती चरण में ही इस हाई-टेक रडार सिस्टम को निशाना बनाया। यह रडार आने वाली बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन का पता लगाने में बेहद अहम भूमिका निभाता है। यदि यह सिस्टम निष्क्रिय हो जाता है तो मिसाइलों को ट्रैक करना और उन्हें इंटरसेप्ट करना बेहद कठिन हो सकता है।

UAE में भी रडार सुविधाओं को नुकसान
रिपोर्ट्स के अनुसार संयुक्त अरब अमीरात में भी दो अलग-अलग स्थानों पर स्थित रडार सुविधाओं पर हमला किया गया।
हालांकि अभी यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि इन हमलों में उपकरण पूरी तरह नष्ट हुए हैं या केवल संरचनात्मक क्षति हुई है। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया है कि उसने UAE में THAAD एयर डिफेंस सिस्टम की एक बैटरी को प्रिसिजन-गाइडेड मिसाइल से नष्ट कर दिया है।

THAAD सिस्टम क्यों है इतना महत्वपूर्ण
THAAD (Terminal High Altitude Area Defense) अमेरिका का सबसे उन्नत मिसाइल डिफेंस सिस्टम माना जाता है। यह सिस्टम उड़ान के दौरान बैलिस्टिक मिसाइलों को ट्रैक करके उन्हें हवा में ही नष्ट करने में सक्षम है। दुनिया भर में इस सिस्टम की कुल 10 बैटरियां मौजूद हैं।
7 बैटरियां अमेरिका के पास,
2 संयुक्त अरब अमीरात के पास,
1 सऊदी अरब के पास,
यदि UAE की दोनों बैटरियां निष्क्रिय हो जाती हैं तो उसके पास बैलिस्टिक मिसाइलों से बचाव के लिए कोई प्रभावी प्रणाली नहीं बचेगी।

कतर में अमेरिकी अर्ली वार्निंग रडार भी क्षतिग्रस्त
ईरान ने कतर में स्थित अल उदीद एयर बेस के पास अमेरिकी अर्ली वार्निंग रडार सिस्टम को भी निशाना बनाया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक AN/FPS-132 फेज्ड ऐरे रडार, जिसकी कीमत लगभग 1.1 अरब डॉलर बताई जा रही है, हमले में बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुआ है। यह रडार अमेरिका के ग्लोबल मिसाइल वार्निंग नेटवर्क का एक महत्वपूर्ण हिस्सा था और इसकी रेंज लगभग 5000 किलोमीटर तक थी।

ऑपरेशन ‘ट्रू प्रॉमिस 4’ के तहत हमले
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने इन हमलों को “ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस 4” का हिस्सा बताया है। ईरानी मीडिया के अनुसार यह कार्रवाई अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के जवाब में की गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक एक सस्ते शाहेद ड्रोन के जरिए अरबों डॉलर के रक्षा सिस्टम को नुकसान पहुंचाया गया, जिससे आधुनिक सैन्य तकनीक की सुरक्षा पर भी सवाल उठने लगे हैं।

खाड़ी देशों की सुरक्षा पर बढ़ा संकट
इन घटनाओं के बाद खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। यदि एयर डिफेंस नेटवर्क कमजोर पड़ता है तो ईरान के लिए ड्रोन और मिसाइल हमले करना पहले से कहीं ज्यादा आसान हो सकता है। रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि UAE और कतर के पास इंटरसेप्टर मिसाइलों की संख्या सीमित है। यदि संघर्ष लंबा चला तो इन देशों के लिए मिसाइलों को रोकना बेहद मुश्किल हो सकता है।

UAE पर सबसे ज्यादा हमले
रिपोर्ट्स के मुताबिक हाल के दिनों में ईरान ने UAE पर 800 से ज्यादा मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं। ईरान ने इजरायल की तुलना में UAE को अधिक निशाना बनाया है, जिससे दुबई और अबू धाबी जैसे बड़े शहरों की सुरक्षा चुनौतीपूर्ण हो गई है।

भविष्य में और बढ़ सकता है तनाव
विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाक्रम केवल शुरुआत हो सकता है। यदि अमेरिका और उसके सहयोगी देशों ने अपनी सुरक्षा रणनीति में बदलाव नहीं किया तो मिडिल ईस्ट में सैन्य टकराव और तेज हो सकता है।
ड्रोन युद्ध की नई रणनीति और सस्ते हथियारों से महंगे रक्षा सिस्टम को नुकसान पहुंचाने की क्षमता आने वाले समय में वैश्विक सैन्य संतुलन को भी प्रभावित कर सकती है।

मिडिल ईस्ट में बढ़ते सैन्य टकराव ने दुनिया की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं। ईरान द्वारा अमेरिकी रडार और मिसाइल डिफेंस सिस्टम को निशाना बनाए जाने से यह साफ हो गया है कि आधुनिक युद्ध अब केवल मिसाइलों से नहीं बल्कि ड्रोन और साइबर रणनीति से भी लड़ा जा रहा है।
आने वाले दिनों में यह देखना बेहद महत्वपूर्ण होगा कि अमेरिका और उसके सहयोगी देश इस चुनौती का सामना कैसे करते हैं।

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