

गुजरात के रूपाल गांव में दलित परिवारों का दर्द: 35 दलित परिवारों ने जताई पलायन की इच्छा
गुजरात के साबरकांठा जिले के रूपाल गांव से सामाजिक भेदभाव और कथित उत्पीड़न का एक गंभीर मामला सामने आया है। गांव में रहने वाले लगभग 35 दलित परिवारों ने आरोप लगाया है कि लगातार भेदभावपूर्ण व्यवहार और सामाजिक दबाव के कारण वे गांव छोड़ने पर विचार करने को मजबूर हो गए हैं। इस घटना ने एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में सामाजिक समानता और संवैधानिक अधिकारों को लेकर बहस छेड़ दी है।
सामाजिक बराबरी पर विरोध के आरोप
दलित परिवारों का आरोप है कि उन्हें मूंछ रखने, अच्छे कपड़े पहनने, वाहन चलाने, शादी-विवाह में बारात निकालने, घोड़ी पर चढ़ने और धार्मिक-सामाजिक आयोजनों में बराबरी से भाग लेने पर विरोध और विवाद का सामना करना पड़ता है। समुदाय के लोगों का कहना है कि सम्मानपूर्वक जीवन जीने के उनके प्रयासों को कई बार सामाजिक दबाव और विरोध का सामना करना पड़ता है।
छुआछूत जैसी प्रथाओं की शिकायतें
स्थानीय लोगों के अनुसार, गांव में अब भी कुछ स्थानों पर भेदभावपूर्ण व्यवहार देखने को मिलता है। आरोप हैं कि स्कूलों में पानी पीने की अलग व्यवस्था की जाती है और कुछ धार्मिक आयोजनों में दलित समुदाय के लोगों को अलग बैठाने जैसी प्रथाएं अपनाई जाती हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि प्रशासनिक स्तर पर होना बाकी है, लेकिन इन शिकायतों ने सामाजिक माहौल को लेकर गंभीर चिंता पैदा कर दी है।
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