लोकसभा से जन्म-मृत्यु संशोधन बिल पास: हंगामे के बीच लोकसभा ने बिल किया पारितसंसद के मानसून सत्र के दौरान विपक्षी सांसदों के भारी हंगामे और नारेबाजी के बीच लोकसभा ने 'जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026' को ध्वनिमत से पारित कर दिया। सदन में विपक्ष छात्र प्रदर्शनकारियों से जुड़े मुद्दे पर चर्चा और गृह मंत्री की उपस्थिति की मांग कर रहा था। इसी दौरान गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने विधेयक पेश किया और शोर-शराबे के बीच इसे मंजूरी मिल गई। दो साल से अधिक देरी पर अब न्यायालय की अनुमति जरूरी नए संशोधन के तहत यदि किसी व्यक्ति के जन्म या मृत्यु का पंजीकरण घटना के दो वर्ष से अधिक समय बाद कराया जाता है, तो अब केवल प्रशासनिक अधिकारी की अनुमति पर्याप्त नहीं होगी। ऐसे मामलों में प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट (JMFC) या संबंधित न्यायिक प्राधिकारी के आदेश के बाद ही पंजीकरण किया जा सकेगा। सरकार का कहना है कि इससे फर्जी प्रमाणपत्रों और दस्तावेजों पर प्रभावी रोक लगेगी। एक से दो वर्ष की देरी पर डीएम या एसडीएम की मंजूरी अनिवार्य यदि जन्म या मृत्यु का पंजीकरण एक वर्ष से अधिक लेकिन दो वर्ष के भीतर कराया जाता है, तो संबंधित व्यक्ति को जिला मजिस्ट्रेट (DM), उप-मंडल मजिस्ट्रेट (SDM) अथवा सरकार द्वारा अधिकृत कार्यकारी मजिस्ट्रेट की लिखित स्वीकृति लेनी होगी। इस व्यवस्था का उद्देश्य सभी विलंबित पंजीकरण मामलों की बेहतर जांच और सत्यापन सुनिश्चित करना है।