अमेरिका-इस्राइल बनाम ईरान युद्ध: मिडिल ईस्ट से हिंद महासागर तक फैला संघर्ष
फ्री होम डिलीवरी
₹0

स्मार्टवॉच ऑफर
₹2,999
मिडिल ईस्ट में चल रहा अमेरिका-इस्राइल और ईरान के बीच सैन्य संघर्ष अब छठे दिन और भी गंभीर रूप ले चुका है। युद्ध का दायरा केवल पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं रहा, बल्कि हिंद महासागर तक फैल गया है।
ईरान के भीतर कई सैन्य और नागरिक ठिकानों पर हमले हुए हैं, जबकि होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और व्यापार पर बड़ा खतरा मंडराने लगा है।
ईरान में युद्ध की मौजूदा स्थिति क्या है?
ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, पिछले पांच दिनों में हुए हमलों में अब तक 1,045 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 6,000 से अधिक लोग घायल हुए हैं।
ईरान के विदेश मंत्रालय ने दावा किया है कि अमेरिका और इस्राइल ने 33 नागरिक ठिकानों को निशाना बनाया है। इनमें शामिल हैं: अस्पताल, स्कूल, तेहरान का प्रमुख आर्थिक केंद्र ग्रैंड बाज़ार, ऐतिहासिक गोलस्तान पैलेस, इसके अलावा उत्तर-पश्चिमी ईरान में कुर्दिश-ईरानी सशस्त्र समूहों ने सरकार के खिलाफ जमीनी हमला भी शुरू कर दिया है।
सत्ता परिवर्तन और ईरान की सैन्य प्रतिक्रिया
ईरान की राजनीति में भी बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के बेटे मोजतबा खामेनेई अगले सर्वोच्च नेता के रूप में सबसे मजबूत दावेदार बनकर उभरे हैं। उनके इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के साथ गहरे संबंध माने जाते हैं। सैन्य मोर्चे पर भी स्थिति बेहद तनावपूर्ण है। श्रीलंका के तट के पास हिंद महासागर में एक अमेरिकी पनडुब्बी ने ईरान के युद्धपोत “आइरिस डेना” को टारपीडो से डुबो दिया।
इस घटना में 87 लोगों के शव बरामद किए गए हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने से वैश्विक व्यापार पर असर
रणनीतिक रूप से बेहद अहम होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की घोषणा के बाद वैश्विक समुद्री व्यापार में भारी व्यवधान देखने को मिल रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार:
दुनिया के कुल तेल व्यापार का लगभग 20% हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है।
वैश्विक LNG व्यापार का करीब 19% भी इसी रास्ते से होता है।
प्रतिदिन लगभग 2 करोड़ बैरल तेल इसी जलमार्ग से गुजरता है।
इस कारण शिपिंग कंपनियां, बीमा कंपनियां और तेल उत्पादक देश बेहद सतर्क हो गए हैं।
तेल बाजार में बढ़ा जोखिम प्रीमियम
वित्तीय संस्थान गोल्डमैन सैक्स की रिपोर्ट के अनुसार: तेल बाजार में पहले ही लगभग 18 डॉलर प्रति बैरल का जोखिम प्रीमियम जुड़ चुका है। अगर जलडमरूमध्य से तेल सप्लाई एक महीने के लिए भी रुकती है, तो कीमतों में भारी उछाल आ सकता है।
तेल की कीमतों में तेज उछाल
मिडिल ईस्ट संकट का असर वैश्विक तेल बाजार पर साफ दिख रहा है। इंटरकॉन्टिनेंटल एक्सचेंज पर बेंचमार्क क्रूड का अप्रैल कॉन्ट्रैक्ट 83.26 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। न्यूयॉर्क मर्केंटाइल एक्सचेंज (NYMEX) पर WTI क्रूड 76.63 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। यह वृद्धि लगभग 2 प्रतिशत से अधिक दर्ज की गई है।
खाड़ी देशों में बढ़ा तनाव
ईरान के जवाबी हमलों के कारण पूरे पश्चिम एशिया में सुरक्षा हालात बिगड़ते जा रहे हैं।
मुख्य घटनाएं:
कुवैत के मुबारक अल-कबीर के पास खड़े तेल टैंकर के पास विस्फोट,
सऊदी अरब की राजधानी रियाद में अमेरिकी दूतावास पर ईरानी ड्रोन हमला,
कतर ने सुरक्षा कारणों से अमेरिकी दूतावास के आसपास के इलाकों को खाली कराना शुरू किया
अमेरिका और इस्राइल का सैन्य रुख
इस्राइल ने तेहरान में सैन्य ठिकानों पर नए हमलों की घोषणा की है। अमेरिकी और पश्चिमी अधिकारियों का दावा है कि उन्होंने ईरान की सैन्य क्षमताओं के बड़े हिस्से को नष्ट कर दिया है।
व्हाइट हाउस का कहना है कि इस कार्रवाई का उद्देश्य: ईरान की नौसैनिक शक्ति को कमजोर करना, उसके परमाणु कार्यक्रम को रोकना, हालांकि एक सर्वे के अनुसार केवल 25% अमेरिकी नागरिक ही इस युद्ध का समर्थन करते हैं।
लेबनान, तुर्की, इराक और चीन की प्रतिक्रिया
यह संघर्ष अब कई देशों को प्रभावित कर रहा है। लेबनान में इस्राइल और हिजबुल्लाह के बीच भारी गोलीबारी, तुर्की के हवाई क्षेत्र में एक ईरानी बैलिस्टिक मिसाइल को NATO ने मार गिराया, उत्तरी इराक में कुर्दिश बल ईरान के खिलाफ ऑपरेशन के लिए तैयार, चीन ने अमेरिका और इस्राइल से तुरंत सैन्य कार्रवाई रोकने की मांग की,
भारत की अर्थव्यवस्था पर संभावित असर
भारत अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरत का 85% से अधिक आयात करता है। इनमें से लगभग 50% तेल मिडिल ईस्ट से आता है, जो मुख्यतः होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है।
विशेषज्ञों के अनुसार: अगर कच्चे तेल की कीमत 1 डॉलर प्रति बैरल बढ़ती है, तो भारत का आयात बिल करीब 16,000 करोड़ रुपए बढ़ सकता है।
हालांकि भारत के पास फिलहाल: लगभग 25 दिनों का कच्चे तेल का भंडार, और 25 दिनों के पेट्रोलियम उत्पादों का स्टॉक मौजूद है। भारत ने रूस, अमेरिका और अफ्रीका से आयात बढ़ाकर अपने स्रोतों में विविधता भी लाई है।
वैश्विक सप्लाई चेन के लिए बड़ा खतरा
यह संघर्ष अब केवल सैन्य लड़ाई नहीं रहा बल्कि एक वैश्विक आर्थिक संकट का रूप ले सकता है। होर्मुज जलडमरूमध्य का बंद होना दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए सबसे बड़ा खतरा बन गया है।
अब पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या कूटनीतिक प्रयास इस संकट को शांत कर पाएंगे या वैश्विक अर्थव्यवस्था को एक बड़ा झटका लगने वाला है।
हेडफोन्स सेल
₹1,499
स्मार्टवॉच ऑफर
₹2,999
टैबलेट मेगा सेल
₹12,999
खबरे और भी है...
मिडिल ईस्ट में जंग की आहट: तेहरान में धमाके
हेडफोन्स सेल
₹1,499
फैशन कलेक्शन
₹799
बेस्ट लैपटॉप डील
₹39,999







