सांसद मनीष तिवारी ने दलबदल कानून बदलाव की मांग: दलबदल विरोधी कानून पर 13वीं बार स्थगन प्रस्तावकांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने लोकसभा में दलबदल विरोधी कानून में व्यापक सुधार की मांग उठाई है।उन्होंने मानसून सत्र के दौरान इस मुद्दे पर लगातार स्थगन प्रस्ताव के नोटिस दिए हैं।तिवारी का कहना है कि मौजूदा कानून अवसरवादी और सामूहिक दलबदल को रोकने में प्रभावी साबित नहीं हुआ है।उनके मुताबिक, यह कानून लोकतंत्र के कामकाज से जुड़ी कई गंभीर समस्याओं की जड़ बन चुका है।उन्होंने नए कानून के जरिए राजनीतिक लाभ के लिए होने वाले दलबदल पर सख्ती की मांग की है।साथ ही सांसदों को नीतिगत मुद्दों पर स्वतंत्र राय रखने की अधिक आजादी देने की बात कही है। 13 बार स्थगन प्रस्ताव देकर उठाया मुद्दा मनीष तिवारी ने दलबदल विरोधी कानून पर संसद में चर्चा कराने की मांग लगातार उठाई है।उनके अनुसार, उन्होंने इस मुद्दे पर 13 बार स्थगन प्रस्ताव का नोटिस दिया है।तिवारी चाहते हैं कि संसद में इस कानून की कमियों पर गंभीर और व्यापक बहस हो।उनका तर्क है कि मौजूदा व्यवस्था जनप्रतिनिधियों की स्वतंत्र राजनीतिक अभिव्यक्ति को सीमित करती है।उन्होंने कहा कि पार्टी अनुशासन और सांसदों की स्वतंत्र राय के बीच संतुलन जरूरी है।इस मांग के साथ दलबदल विरोधी कानून में सुधार को लेकर नई राजनीतिक बहस शुरू हो सकती है। पार्टी व्हिप की सीमा तय करने की मांग मनीष तिवारी ने पार्टी व्हिप के इस्तेमाल को सीमित करने का सुझाव दिया है।उनका मानना है कि व्हिप मुख्य रूप से सरकार की स्थिरता से जुड़े महत्वपूर्ण मामलों तक सीमित होना चाहिए।अविश्वास प्रस्ताव, बजट और धन विधेयक जैसे मुद्दों पर पार्टी अनुशासन जरूरी बताया गया है।वहीं सामान्य विधेयकों और नीतिगत मुद्दों पर सांसदों को अपने विवेक से मतदान की स्वतंत्रता मिलनी चाहिए।तिवारी के अनुसार, इससे जनप्रतिनिधि जनता की राय और अपने विचारों को सदन में बेहतर तरीके से रख सकेंगे।उनका प्रस्ताव पार्टी अनुशासन और लोकतांत्रिक असहमति के बीच संतुलन पर जोर देता है।