नूर खान एयरबेस पर बड़ा हमला: अफगानिस्तान–पाकिस्तान टकराव ‘ओपन वॉर’ की ओर?

अफगानिस्तान–पाकिस्तान टकराव ‘ओपन वॉर’ की ओर?
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नूर खान एयरबेस एक बार फिर सुर्खियों में है। अफगानिस्तान के रक्षा मंत्रालय ने दावा किया है कि उसकी वायुसेना ने रावलपिंडी स्थित इस रणनीतिक एयरबेस समेत पाकिस्तान के कई अहम सैन्य ठिकानों पर सटीक हवाई हमले किए हैं।
यह वही एयरबेस है, जिसे भारत ने 2025 में कथित तौर पर ऑपरेशन सिंदूर के दौरान ब्रह्मोस मिसाइल से निशाना बनाया था। अब अफगानिस्तान के हमले के दावे ने इस इलाके को फिर से वैश्विक चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

अफगानिस्तान का दावा: जवाबी कार्रवाई
अफगान रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यह हमला पाकिस्तान की ओर से काबुल और बगराम एयरबेस के ऊपर कथित हवाई उल्लंघन के जवाब में किया गया।
अफगान बयान में कहा गया: नूर खान एयरबेस, क्वेटा में 12 कोर मुख्यालय, खैबर पख्तूनख्वा का मोहम्मद एजेंसी इलाका, इन सभी ठिकानों को “सटीक निशाने” के साथ टारगेट किया गया और भारी नुकसान पहुंचाया गया। हालांकि पाकिस्तान ने अभी तक इन हमलों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

पाकिस्तान का पलटवार: 415 तालिबान लड़ाके मारे गए
पाकिस्तान ने दावा किया है कि उसने “ऑपरेशन गजब लिल-हक” के तहत बड़े पैमाने पर जवाबी कार्रवाई की है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक: 415 अफगान तालिबान लड़ाके मारे गए, 580 से अधिक घायल, 182 चौकियां नष्ट, 31 पोस्ट्स पर कब्जा, 185 टैंक/बख्तरबंद वाहन तबाह, पाकिस्तानी सेना ने इसे आत्मरक्षा और टीटीपी के खिलाफ जरूरी कदम बताया है।

बगराम एयरबेस पर हमले की कोशिश नाकाम
अफगान अधिकारियों ने यह भी दावा किया कि पाकिस्तान ने बगराम एयरबेस को निशाना बनाने की कोशिश की, लेकिन अफगान एयर डिफेंस ने हमले को नाकाम कर दिया। राजधानी काबुल में एंटी-एयरक्राफ्ट गन से फायरिंग की आवाजें सुनी गईं।

ड्यूरंड लाइन विवाद और पुराना तनाव
ड्यूरंड लाइन लंबे समय से दोनों देशों के बीच विवाद का कारण रही है। पाकिस्तान आरोप लगाता है कि अफगानिस्तान की जमीन से टीटीपी जैसे संगठन हमले कर रहे हैं। वहीं अफगानिस्तान का कहना है कि पाकिस्तान लगातार उसके हवाई क्षेत्र का उल्लंघन कर रहा है।

सैन्य ताकत की तुलना: कौन किस पर भारी?
पाकिस्तान:
6,60,000 सक्रिय सैनिक, 1,397 विमान (331 फाइटर जेट), 2,677 टैंक, लगभग 170 परमाणु हथियार, शाहीन और अबाबील मिसाइल सीरीज,
अफगानिस्तान: लगभग 1,72,000 सक्रिय सैनिक, सीमित एयर पावर (6 विमान, 23 हेलीकॉप्टर), सोवियत दौर के हथियार, कोई परमाणु क्षमता नहीं,
स्पष्ट है कि हवाई और मिसाइल क्षमता में पाकिस्तान को निर्णायक बढ़त है, लेकिन सीमा संघर्ष में गुरिल्ला रणनीति अफगानिस्तान को सामरिक लाभ दे सकती है।

वैश्विक परिदृश्य: क्या क्षेत्रीय युद्ध का खतरा?
यह संघर्ष ऐसे समय में बढ़ा है जब मिडिल ईस्ट पहले से तनावग्रस्त है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय—कतर, सऊदी अरब और संयुक्त राष्ट्र—ने संयम बरतने की अपील की है। अमेरिका के पूर्व अफगान प्रतिनिधि जाल्मे खलीलजाद ने भी बातचीत के जरिए समाधान की बात कही है।

पाकिस्तान में अफगान नागरिकों पर कार्रवाई
तनाव बढ़ने के बाद पेशावर समेत कई शहरों में सैकड़ों अफगान नागरिकों को अवैध रूप से रहने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। अफगान पक्ष ने इसे हालात बिगाड़ने वाला कदम बताया है।

निष्कर्ष: क्या जंग और बढ़ेगी?
फरवरी 2026 से शुरू हुआ यह तनाव अब खुली जंग का रूप लेता दिख रहा है। दोनों देशों के दावे अलग-अलग हैं, हताहतों के आंकड़े विरोधाभासी हैं और सीमा झड़प अब शहरों तक पहुंच चुकी है। अगर कूटनीतिक हस्तक्षेप नहीं हुआ, तो यह टकराव पूरे दक्षिण एशिया और मिडिल ईस्ट की स्थिरता को प्रभावित कर सकता है।

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