ओम बिरला के AI वीडियो विवाद पर घमासान: सुप्रिया श्रीनेत बोलीं—
देश में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के दुरुपयोग को लेकर राजनीतिक विवाद गहराता जा रहा है। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जुड़े कथित AI जेनरेटेड वीडियो के मामले में लोकसभा सचिवालय ने कांग्रेस के कई नेताओं को नोटिस जारी किया है।
इस मामले में कांग्रेस की सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म की चेयरपर्सन सुप्रिया श्रीनेत समेत कुल 9 नेताओं से तीन दिनों के भीतर जवाब मांगा गया है। नोटिस जारी होने के बाद कांग्रेस और बीजेपी के बीच राजनीतिक टकराव तेज हो गया है।
सुप्रिया श्रीनेत का सरकार पर बड़ा हमला
कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने इस कार्रवाई पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए केंद्र सरकार पर युवाओं को डराने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पिछले 6 हफ्तों में कांग्रेस द्वारा बनाए गए AI आधारित 9 वीडियो सरकार द्वारा हटवाए जा चुके हैं। उनका आरोप है कि सरकार डिजिटल स्पेस में असहमति को दबाने की कोशिश कर रही है।
सुप्रिया श्रीनेत ने कहा: “सरकार 20–21 साल के युवाओं को डराने की कोशिश कर रही है, ताकि वे सोशल मीडिया पर सरकार की आलोचना न कर सकें।”
किन नेताओं को मिला नोटिस
लोकसभा सचिवालय ने कांग्रेस के जिन नेताओं को नोटिस भेजा है, उनमें शामिल हैं: जयराम रमेश, पवन खेड़ा, सुप्रिया श्रीनेत, संजीव सिंह, अन्य कांग्रेस पदाधिकारी (कुल 9 नेता), इन सभी से 3 दिनों के भीतर जवाब देने को कहा गया है।
विशेषाधिकार हनन और सदन की अवमानना का आरोप
बीजेपी सांसद विष्णु दत्त शर्मा की शिकायत के बाद यह मामला सामने आया। लोकसभा सचिवालय के विशेषाधिकार विभाग ने इसे सदन की अवमानना और विशेषाधिकार हनन का मामला मानते हुए नोटिस जारी किया है।
सचिवालय के अनुसार, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर स्पीकर ओम बिरला का कथित अपमानजनक AI वीडियो और कैरिकेचर साझा किया गया था।
क्या था AI वीडियो का मामला
जानकारी के अनुसार, सितंबर 2025 में बिहार कांग्रेस के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट से एक 36 सेकंड का AI वीडियो पोस्ट किया गया था। इस वीडियो में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दिवंगत माताजी को उनकी राजनीति की आलोचना करते हुए दिखाया गया था। इसके अलावा दिसंबर 2025 में लोकसभा स्पीकर ओम बिरला का एक डीपफेक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें उन्हें एक योजना के तहत गरीब परिवारों को 12,000 रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा करते हुए दिखाया गया था।
जांच में फर्जी पाया गया वीडियो
सरकारी एजेंसी PIB Fact Check और अन्य जांच में यह वीडियो पूरी तरह फर्जी पाया गया। असल वीडियो 1 दिसंबर 2025 का था, जिसमें लोकसभा स्पीकर दिवंगत सांसदों को श्रद्धांजलि दे रहे थे। AI तकनीक की मदद से उस वीडियो की आवाज और ऑडियो बदलकर इसे भ्रामक तरीके से वायरल किया गया था।
दिल्ली पुलिस ने दर्ज की FIR
इस मामले में दिल्ली पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत FIR दर्ज की थी। वहीं पटना हाई कोर्ट ने कांग्रेस को इस वीडियो को सोशल मीडिया से तुरंत हटाने का निर्देश भी दिया था।
हो सकती है कड़ी कानूनी और संसदीय कार्रवाई
लोकसभा सचिवालय ने साफ संकेत दिया है कि यदि नोटिस का संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो संबंधित नेताओं के खिलाफ संसदीय कार्रवाई और कानूनी कदम उठाए जा सकते हैं। AI और डीपफेक तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के बीच यह मामला देश में डिजिटल कंटेंट की विश्वसनीयता और राजनीतिक जिम्मेदारी को लेकर नई बहस छेड़ रहा है।



