जितेंद्र सिंह पर विशेषाधिकार हनन नोटिस: वेणुगोपाल का विशेषाधिकार प्रस्तावसंसद के मानसून सत्र के दौरान केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह के खिलाफ कांग्रेस ने बड़ा संसदीय कदम उठाया है। कांग्रेस महासचिव और सांसद के.सी. वेणुगोपाल ने उनके कथित भ्रामक और तथ्यहीन बयानों को लेकर विशेषाधिकार हनन (Privilege Motion) का नोटिस दिया है। इस कदम से संसद का राजनीतिक माहौल और अधिक गरमा गया है। अब इस मामले पर सभापति और लोकसभा अध्यक्ष के स्तर पर आगे की प्रक्रिया तय होगी। कांग्रेस ने लगाया सदन को गुमराह करने का आरोप के.सी. वेणुगोपाल ने आरोप लगाया कि केंद्रीय मंत्री ने सदन में दिए गए अपने बयान के दौरान तथ्यात्मक रूप से गलत जानकारी प्रस्तुत की, जिससे संसद को गुमराह करने का प्रयास हुआ। कांग्रेस का कहना है कि मंत्री के बयान की सत्यता की जांच कर उचित कार्रवाई की जानी चाहिए। विपक्ष ने इसे संसदीय परंपराओं और जवाबदेही से जुड़ा गंभीर मामला बताया है। क्या होता है विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव? विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव तब लाया जाता है जब किसी सांसद या मंत्री पर संसद को गलत जानकारी देने, सदन की गरिमा प्रभावित करने या संसदीय विशेषाधिकारों का उल्लंघन करने का आरोप लगता है। यदि पीठासीन अधिकारी नोटिस स्वीकार करते हैं, तो मामले को विशेषाधिकार समिति के पास भेजा जा सकता है। समिति की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होती है।