हिंद महासागर में बड़ा सैन्य टकराव: अमेरिकी पनडुब्बी के हमले में डूबा ईरानी युद्धपोत ‘IRIS डेना’
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पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच हिंद महासागर में एक बड़ा सैन्य घटनाक्रम सामने आया है। रिपोर्टों के मुताबिक अमेरिकी नौसेना की एक पनडुब्बी ने ईरान के युद्धपोत IRIS डेना (Denna) पर टॉरपीडो हमला कर उसे डुबो दिया। यह घटना श्रीलंका के दक्षिणी तट के पास अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में हुई बताई जा रही है।
बताया जा रहा है कि इस हमले में 80 से अधिक नाविकों की मौत हो गई, जबकि कई लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। इस घटना ने वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव को और बढ़ा दिया है।
भारत आया था ईरानी युद्धपोत
रिपोर्ट के अनुसार ईरानी युद्धपोत IRIS डेना हाल ही में भारत के विशाखापत्तनम पहुंचा था। यह जहाज 16 फरवरी को आयोजित अंतर्राष्ट्रीय बेड़ा समीक्षा 2026 और मल्टीनेशनल नौसैनिक अभ्यास ‘मिलन-2026’ में भाग लेने के लिए भारत आया था।
भारतीय पूर्वी नौसेना कमान ने उस समय इसे भारत और ईरान के बीच लंबे समय से चले आ रहे रणनीतिक और सांस्कृतिक संबंधों का प्रतीक बताया था। इसी वजह से इस घटना को और भी संवेदनशील माना जा रहा है।
श्रीलंका के पास हुआ टॉरपीडो हमला
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक श्रीलंका के दक्षिणी समुद्री क्षेत्र के पास एक अमेरिकी पनडुब्बी ने ईरानी जहाज को निशाना बनाया। बताया जा रहा है कि पनडुब्बी से दागा गया टॉरपीडो जहाज के पिछले हिस्से के नीचे जाकर विस्फोट हुआ, जिससे जहाज को भारी नुकसान पहुंचा और वह तेजी से डूब गया।
घटना के बाद श्रीलंका की नौसेना और स्थानीय एजेंसियों ने राहत और बचाव अभियान चलाया। अब तक 32 नाविकों को समुद्र से सुरक्षित निकाला गया, जबकि कई शव भी बरामद किए गए हैं।
ईरान ने अमेरिका पर लगाया गंभीर आरोप
ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने इस हमले को लेकर अमेरिका पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि यह हमला अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में बिना किसी चेतावनी के किया गया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इसे “समुद्र में किया गया जघन्य अपराध” बताते हुए कहा कि अमेरिका को इस कदम के लिए भविष्य में पछताना पड़ेगा।
ईरान का कहना है कि जहाज पर करीब 130 से 180 नाविक मौजूद थे और यह हमला ईरान के तट से लगभग 2000 मील दूर किया गया।
अमेरिका ने हमले को बताया ‘प्रभावी कार्रवाई’
अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने इस हमले को “शांत लेकिन घातक अंत” बताया है। उनके मुताबिक यह ऑपरेशन बेहद तेजी और सटीकता के साथ किया गया। वहीं जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन कैन ने कहा कि टॉरपीडो का असर तुरंत दिखाई दिया और उसने अपने लक्ष्य को गंभीर नुकसान पहुंचाया।
द्वितीय विश्व युद्ध के बाद पहली ऐसी घटना
विशेषज्ञों का कहना है कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद यह पहली बार है जब अमेरिकी पनडुब्बी ने युद्ध की स्थिति में टॉरपीडो दागकर किसी दुश्मन युद्धपोत को डुबोया है।
इतिहास में इससे पहले ऐसा 14 अगस्त 1945 को हुआ था, जब अमेरिकी पनडुब्बी USS Torsk ने जापान के एक गश्ती जहाज को निशाना बनाकर डुबो दिया था। करीब 80 साल बाद समुद्री युद्ध की उसी रणनीति की झलक फिर से देखने को मिली है।
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ हमला
इस हमले से जुड़ा एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें समुद्र के बीच अमेरिकी युद्धपोत से मिसाइल और टॉरपीडो दागे जाने के दृश्य दिखाई दे रहे हैं। वीडियो में जहाज के पास जोरदार विस्फोट और धुएं का गुबार साफ देखा जा सकता है। वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर यह घटना तेजी से वायरल हो गई और दुनिया भर में इस पर चर्चा शुरू हो गई।
मिडिल ईस्ट में बढ़ सकता है तनाव
विश्लेषकों का मानना है कि यह घटना मिडिल ईस्ट और हिंद महासागर क्षेत्र में तनाव को और बढ़ा सकती है। ईरान और अमेरिका के बीच पहले से चल रहे टकराव के बीच यह सैन्य कार्रवाई एक नए संकट का संकेत मानी जा रही है। दुनिया की नजर अब इस बात पर है कि इस घटना के बाद दोनों देशों की ओर से क्या अगला कदम उठाया जाता है।
हिंद महासागर में ईरानी युद्धपोत IRIS डेना के डूबने की घटना ने वैश्विक राजनीति और सैन्य रणनीति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद पहली बार इस तरह की कार्रवाई सामने आने से दुनिया भर में चिंता और चर्चा दोनों बढ़ गई हैं। आने वाले दिनों में यह घटना अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और सैन्य संतुलन पर बड़ा असर डाल सकती है।
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