राइट टू रिकॉल पर संसद में गूंज: बजट सत्र 2026 में उठा बड़ा मुद्दा
राज्यसभा में बजट सत्र 2026 के दौरान आम आदमी पार्टी (आप) के सांसद Raghav Chadha ने भारत में “राइट टू रिकॉल” यानी जनप्रतिनिधियों को बीच कार्यकाल में हटाने का अधिकार लागू करने की मांग उठाई। उन्होंने कहा, “मतदाताओं को किसी को पद पर बिठाने का अधिकार है और उन्हें उसे पद से हटाने का भी अधिकार होना चाहिए।”
चड्ढा ने इस प्रस्ताव को नागरिक सशक्तिकरण की दिशा में अहम कदम बताते हुए कहा कि इससे लोकतंत्र में जवाबदेही मजबूत होगी और राजनीतिक दल बेहतर उम्मीदवारों को मैदान में उतारने के लिए बाध्य होंगे।
क्या है ‘राइट टू रिकॉल’?
राइट टू रिकॉल एक लोकतांत्रिक व्यवस्था है, जिसमें मतदाता अपने चुने हुए प्रतिनिधि (सांसद/विधायक) को कार्यकाल पूरा होने से पहले पद से हटा सकते हैं, यदि वह अपने कर्तव्यों का सही निर्वहन नहीं करता।
चड्ढा ने अपने आधिकारिक एक्स (पूर्व ट्विटर) हैंडल पर लिखा कि यदि राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति या न्यायाधीशों के खिलाफ महाभियोग चलाया जा सकता है और सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया जा सकता है, तो जनता को भी गैर-कार्यशील सांसद या विधायक को हटाने का अधिकार मिलना चाहिए।
संसद में क्या बोले राघव चड्ढा?
सत्र के 11वें दिन बोलते हुए उन्होंने कहा, वर्तमान में मतदाता अपने प्रतिनिधि को चुन तो सकते हैं, लेकिन कार्यकाल के बीच उन्हें सीधे जवाबदेह ठहराने की कोई औपचारिक प्रक्रिया नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया, “पांच साल तक एक गैर-कार्यकारी सांसद या विधायक को क्यों बर्दाश्त किया जाए?”





