नोएडा के दलित प्रेरणा स्थल पर जातिवादी टिप्पणी: ‘मायावती का पार्क बंद करो’ जैसे नारे निंदनीय
नोएडा स्थित दलित प्रेरणा स्थल, जिसे भारतीय संविधान, सामाजिक न्याय, समानता और लोकतांत्रिक मूल्यों का प्रतीक माना जाता है, हाल ही में एक बेहद निंदनीय घटना का गवाह बना। कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा इस ऐतिहासिक और प्रेरणादायी स्थल पर जातिवादी टिप्पणी, अनुचित भाषा का प्रयोग और क्रिंज व आपत्तिजनक वीडियो बनाए जाने की घटना सामने आई है, जिसने समाज के हर संवेदनशील नागरिक को झकझोर कर रख दिया है।
घटना के दौरान इन तत्वों द्वारा “मायावती का पार्क बंद करो” जैसे भड़काऊ और अपमानजनक नारे भी लगाए गए। यह कृत्य न केवल एक समुदाय विशेष की भावनाओं को आहत करने वाला है, बल्कि संविधान में निहित समानता और भाईचारे की भावना पर सीधा हमला माना जा रहा है। सामाजिक संगठनों, बहुजन समाज और संविधान में आस्था रखने वाले नागरिकों ने इस घटना की कड़ी निंदा की है।
संविधानिक प्रतीकों का खुला अपमान
दलित प्रेरणा स्थल कोई साधारण पार्क या स्मारक नहीं है। यह स्थल भारत रत्न डॉ. भीमराव आंबेडकर, महात्मा ज्योतिबा फुले, छत्रपति शाहूजी महाराज और अन्य महान समाज सुधारकों की स्मृति को समर्पित है, जिन्होंने जीवनभर सामाजिक समानता, शिक्षा और न्याय के लिए संघर्ष किया।
ऐसे पवित्र और ऐतिहासिक स्थल पर जातिवादी सोच का प्रदर्शन करना केवल एक स्थान का अपमान नहीं, बल्कि भारतीय संविधान, लोकतंत्र और सामाजिक न्याय की अवधारणा का सीधा अपमान है। जानकारों का कहना है कि यह घटना बताती है कि आज भी समाज में कुछ तत्व संविधानिक मूल्यों को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं हैं।







