साइबर क्राइम के नाम अकाउंट फ्रीज करना गैर-कानूनी: नियम नहीं माना तो बैंक पर चलेगा क्रिमिनल केस

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आज के डिजिटल दौर में साइबर फ्रॉड के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। ऑनलाइन ट्रांजैक्शन, UPI, नेट बैंकिंग और डिजिटल पेमेंट के बढ़ते इस्तेमाल के साथ ही साइबर अपराधियों की गतिविधियां भी बढ़ी हैं। ऐसे में अक्सर देखने को मिलता है कि साइबर फ्रॉड की जांच के नाम पर पुलिस किसी आम नागरिक का पूरा बैंक अकाउंट फ्रीज करवा देती है, जबकि उस व्यक्ति ने कोई गलती नहीं की होती।
लेकिन अब इस मनमानी पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा है कि पुलिस सिर्फ एक फोन कॉल या सामान्य सूचना के आधार पर किसी का बैंक अकाउंट फ्रीज नहीं करवा सकती। ऐसा करना कानून के खिलाफ है और इससे आम नागरिकों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन होता है।
पुलिस को FIR और ठोस सबूत देना होगा
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में यह स्पष्ट किया कि साइबर फ्रॉड से जुड़े किसी भी मामले में सबसे पहले पुलिस को यह साबित करना होगा कि वास्तव में उस बैंक अकाउंट से फ्रॉड हुआ है।
इसके लिए पुलिस को कुछ जरूरी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करना अनिवार्य होगा:
सबसे पहले FIR दर्ज करना जरूरी होगा,
FIR की कॉपी बैंक को उपलब्ध करानी होगी,
यह स्पष्ट करना होगा कि कौन-सी रकम फ्रॉड से जुड़ी है,
यह भी बताना होगा कि वह रकम किस लेनदेन के जरिए अकाउंट में आई,
कोर्ट ने साफ कहा कि सिर्फ शक, मौखिक सूचना या सामान्य इनपुट के आधार पर किसी का अकाउंट होल्ड या फ्रीज नहीं किया जा सकता।
खालसा मेडिकल स्टोर बनाम RBI केस में आया ऐतिहासिक फैसला
यह अहम फैसला KHALSA MEDICAL STORE VS RBI मामले की सुनवाई के दौरान सामने आया। इस केस में खालसा मेडिकल स्टोर के मालिक यशवंत सिंह का एक्सिस बैंक अकाउंट पुलिस के कहने पर पूरी तरह फ्रीज कर दिया गया था।
चौंकाने वाली बात यह थी कि:
कोई स्पष्ट FIR बैंक को नहीं दी गई,
कोई सीजर ऑर्डर (जब्ती आदेश) मौजूद नहीं था,
यह भी नहीं बताया गया कि कौन-सी रकम फ्रॉड से जुड़ी है,
हाईकोर्ट ने इस कार्रवाई को मनमाना, अनुचित और गैर-कानूनी करार दिया और बैंक को तुरंत अकाउंट डी-फ्रीज करने का आदेश दिया।
बैंक अकाउंट फ्रीज क्या होता है?
जब किसी व्यक्ति के बैंक अकाउंट से: पैसे निकालने, पैसे ट्रांसफर करने, UPI, ATM, चेक या ऑनलाइन ट्रांजैक्शन, पर पूरी तरह रोक लगा दी जाती है, तो इसे बैंक अकाउंट फ्रीज या बैंकिंग भाषा में Lien / Debit Freeze कहा जाता है।
अक्सर ऐसा तब होता है जब साइबर पुलिस मनी ट्रेल की जांच कर रही होती है। मनी ट्रेल का मतलब है – पैसा कहां से आया, कहां गया और किन-किन अकाउंट्स से होकर गुजरा।
लेकिन कई मामलों में निर्दोष लोगों के अकाउंट भी सिर्फ इसलिए फ्रीज कर दिए जाते हैं क्योंकि उनके अकाउंट में किसी संदिग्ध लेनदेन की रकम आ गई होती है।
हाईकोर्ट ने तय किए 5 अहम नियम (5-Point Protocol)
इलाहाबाद हाईकोर्ट की बेंच, जिसमें जस्टिस शेखर बी. सर्राफ और जस्टिस मनजीव शुक्ला शामिल थे, ने साइबर क्राइम मामलों में बैंक अकाउंट फ्रीज करने को लेकर 5 अहम नियम तय किए:
1. सिर्फ शक के आधार पर अकाउंट फ्रीज नहीं किया जा सकता
BNSS की धारा 106 की व्याख्या इस तरह नहीं की जा सकती कि पुलिस को सिर्फ शक के आधार पर किसी की संपत्ति जब्त करने का अधिकार मिल जाए।
2. FIR और अपराध से जुड़ी जानकारी देना अनिवार्य
पुलिस को बैंक को FIR की कॉपी और अपराध से जुड़ी पूरी जानकारी देनी होगी। बिना FIR के बैंक रिक्वेस्ट को खारिज कर सकता है।
3. केवल फ्रॉड से जुड़ी रकम ही ब्लॉक होगी
पुलिस पूरे अकाउंट को फ्रीज करने के लिए नहीं कह सकती। सिर्फ उसी रकम को रोका जा सकता है जो फ्रॉड की चेन का हिस्सा हो।
4. 24 घंटे में मजिस्ट्रेट को सूचना देना जरूरी
जैसे ही अकाउंट फ्रीज किया जाए, पुलिस को 24 घंटे के भीतर संबंधित मजिस्ट्रेट को सूचना देना अनिवार्य होगा। ऐसा न करने पर कार्रवाई अवैध मानी जाएगी।
5. नियम तोड़े तो बैंक पर सिविल और क्रिमिनल केस
अगर कोई बैंक बिना कानूनी प्रक्रिया के पुलिस के कहने पर अकाउंट फ्रीज करता है, तो बैंक खुद कानूनी कार्रवाई का जिम्मेदार होगा।
बिना प्रक्रिया अकाउंट फ्रीज हुआ तो बैंक भी जिम्मेदार
कोर्ट ने बेहद सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि बैंक ने:
बिना FIR,
बिना जब्ती आदेश,
बिना रकम स्पष्ट किए,
किसी नागरिक या संस्था का अकाउंट फ्रीज किया, तो बैंक को उस व्यक्ति को हुए आर्थिक नुकसान और प्रतिष्ठा को हुए नुकसान की भरपाई करनी होगी। इतना ही नहीं, ऐसे मामलों में बैंक अधिकारियों पर सिविल और क्रिमिनल केस भी चल सकता है।
आम लोगों के लिए क्या है इस फैसले का मतलब?
इस फैसले के बाद आम नागरिकों को बड़ी राहत मिली है। अब:
आपका पूरा बैंक अकाउंट यूं ही फ्रीज नहीं किया जा सकेगा,
पुलिस और बैंक दोनों को कानून का पालन करना होगा,
बिना FIR और ठोस सबूत अकाउंट होल्ड नहीं किया जा सकता,
अगर आपका अकाउंट गलत तरीके से फ्रीज हुआ है, तो आप इस फैसले का हवाला देकर बैंक और पुलिस से जवाब मांग सकते हैं|
सीधी और साफ बात:
अब कॉल, व्हाट्सएप मैसेज या मौखिक सूचना से बैंक अकाउंट फ्रीज नहीं होगा। कानून आपकी तरफ है।







