KGMU धर्मांतरण केस: छांगुर बाबा से जुड़े बड़े नेटवर्क की परतें खुलीं

छांगुर बाबा से जुड़े बड़े नेटवर्क की परतें खुलीं

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उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) से जुड़े बहुचर्चित धर्मांतरण मामले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। लंबे समय से फरार चल रहे आरोपी डॉक्टर रमीज मलिक को लखनऊ पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी पर 50 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया था और वह बीते दो हफ्तों से अधिक समय से पुलिस की पकड़ से बाहर था।

जांच में सामने आया है कि डॉक्टर रमीज पर महिलाओं को भावनात्मक, मानसिक और निजी संबंधों के जरिए अपने जाल में फंसाने और फिर धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर करने के गंभीर आरोप हैं। इस केस ने तब और तूल पकड़ लिया, जब पीड़िता ने मानसिक प्रताड़ना से तंग आकर आत्महत्या की कोशिश की।

छांगुर बाबा कनेक्शन और संगठित साजिश
जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, वैसे-वैसे डॉक्टर रमीज की गतिविधियां एक बड़े और संगठित नेटवर्क की ओर इशारा करने लगीं। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, रमीज का नाम बलरामपुर के चर्चित छांगुर बाबा धर्मांतरण सिंडिकेट से जुड़ता दिख रहा है, जहां करीब 100 करोड़ रुपये की फंडिंग और सैकड़ों महिलाओं के धर्मांतरण का खुलासा हो चुका है।
हालांकि दोनों आरोपी फिलहाल जेल में हैं, लेकिन जांच एजेंसियों का मानना है कि यह नेटवर्क अभी पूरी तरह बेनकाब नहीं हुआ है। फंडिंग, संरक्षण और सिस्टम में मिलीभगत जैसे सवाल अब और गहरे होते जा रहे हैं।

मोबाइल फोन से मिले सनसनीखेज सबूत
पुलिस ने आरोपी डॉक्टर रमीज के मोबाइल फोन से कई अहम चैट्स बरामद की हैं, जो धर्मांतरण से जुड़ी गतिविधियों की ओर इशारा करती हैं। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी के फोन में जाकिर नायक के वीडियो, कई महिलाओं की आपत्तिजनक तस्वीरें और डॉक्टरों के साथ की गई चैट मौजूद थीं।
इसके अलावा, पुलिस को कई अन्य हिंदू युवतियों से बातचीत के प्रमाण भी मिले हैं, जिससे संकेत मिलता है कि आरोपी एक से अधिक महिलाओं को निशाना बना रहा था।

संस्थान की लापरवाही पर सवाल
जांच में यह भी सामने आया कि पीड़िता ने शुरुआत में ही अपने विभागाध्यक्ष सुरेश बाबू और मोहम्मद वाहिद को पूरी आपबीती बताई थी, लेकिन आरोप है कि शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया गया। करीब पांच दिनों तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, जिससे पीड़िता की मानसिक स्थिति और बिगड़ती चली गई।

इस पूरे मामले पर उत्तर प्रदेश महिला आयोग ने कड़ा रुख अपनाया है। आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव ने इसे गंभीर लापरवाही बताते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को विस्तृत रिपोर्ट सौंपी है और आरोप लगाया है कि प्रारंभिक स्तर पर शिकायत को दबाने की कोशिश की गई।

ATS और ED की एंट्री
धर्मांतरण और विदेशी फंडिंग के आरोपों को देखते हुए अब इस पूरे नेटवर्क की जांच में यूपी ATS और प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी जुट गई हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहले ही साफ कर चुके हैं कि इस तरह की गतिविधियां केवल समाज विरोधी नहीं, बल्कि राष्ट्र विरोधी हैं और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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