“एक देश, दो कानून क्यों?”: दोहरे मापदंडों पर सरकार को घेरा
संसद के बजट सत्र के दौरान नगीना से सांसद और आज़ाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रशेखर आज़ाद ने न्याय व्यवस्था और प्रशासनिक कार्रवाई में कथित दोहरे मापदंडों (Double Standards) को लेकर केंद्र सरकार पर जोरदार हमला बोला। उनका यह भाषण न सिर्फ सदन में गूंजा, बल्कि अब यह मुद्दा सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक चर्चा का केंद्र बन गया है।
“नाम, जाति और रसूख देखकर क्यों तय होती है न्याय की रफ्तार?”
3 फरवरी 2026 को लोकसभा में बोलते हुए चंद्रशेखर आज़ाद ने बेहद तीखे शब्दों में सवाल उठाया— “आख़िर देश में न्याय की रफ्तार नाम, जाति और रसूख देखकर क्यों तय होती है?” उन्होंने कहा कि भारत का संविधान सभी नागरिकों को समान अधिकार देता है, लेकिन व्यवहार में कानून का इस्तेमाल समान रूप से नहीं हो रहा। किसी के लिए कानून बेहद नरम है, तो किसी के लिए वही कानून हथौड़े की तरह गिरता है।
प्रभावशाली लोगों पर खामोशी, कमजोर वर्गों पर सख़्ती
अपने भाषण में चंद्रशेखर आज़ाद ने हालिया घटनाओं का ज़िक्र करते हुए कहा कि जब प्रभावशाली, रसूखदार और सत्ता से जुड़े लोग गंभीर अपराध करते हैं, तब प्रशासन की भूमिका सवालों के घेरे में आ जाती है। ऐसे मामलों में या तो जांच ठंडी पड़ जाती है, या फिर कार्रवाई में असामान्य देरी होती है। इसके उलट, उन्होंने आरोप लगाया कि दलितों, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों से जुड़े मामलों में बिना पूरी जांच-पड़ताल के ही त्वरित और कठोर कदम उठा लिए जाते हैं। उन्होंने विशेष तौर पर बुलडोजर कार्रवाई का हवाला देते हुए कहा कि यह न्याय का नहीं, बल्कि डर का प्रतीक बनती जा रही है।





