हवाई यात्रियों के हक की आवाज सदन में गूंजी: एक किलो बैगेज पर हजारों का चार्ज

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं
पहले आप अपनी बात रखें
देश में बढ़ती हवाई यात्रा के बीच एयरलाइन कंपनियों के रवैये पर अब सवाल उठने लगे हैं। आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने संसद में हवाई यात्रियों से जुड़ा एक अहम मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि एयरलाइंस कंपनियां यात्रियों से एक किलो भी अतिरिक्त सामान पर भारी शुल्क वसूलती हैं, लेकिन जब फ्लाइट घंटों लेट हो जाती है तो यात्रियों को कोई मुआवजा नहीं दिया जाता।
सदन में क्या बोले राघव चड्ढा?
राघव चड्ढा ने राज्यसभा में कहा: “अगर आपका एक किलो बैगेज ओवरवेट हो जाए तो एयरलाइन हजारों रुपये एक्सेस बैगेज चार्ज के नाम पर वसूल लेती है। लेकिन जब फ्लाइट कई घंटों तक लेट हो जाती है, तब क्या एयरलाइन यात्रियों को हर्जाना देती है?”
उन्होंने यह भी बताया कि कई बार अतिरिक्त बैगेज शुल्क इतना अधिक होता है कि कुछ यात्री अपना सामान एयरपोर्ट पर ही छोड़कर जाने को मजबूर हो जाते हैं। AAP सांसद ने नागरिक उड्डयन मंत्री से मांग की कि ऐसा मेकैनिज्म (प्रणाली) बनाया जाए, जिसमें हर घंटे की देरी पर यात्रियों को मुआवजा मिले।
एक्स्ट्रा बैगेज पर सख्ती, देरी पर चुप्पी?
एयरलाइन कंपनियां प्रति किलो अतिरिक्त वजन पर भारी शुल्क वसूलती हैं।
फ्लाइट में देरी होने पर यात्रियों को लंबा इंतजार करना पड़ता है।
यात्रियों के काम, मीटिंग्स और निजी योजनाएं प्रभावित होती हैं।
फिर भी देरी के लिए स्पष्ट मुआवजा व्यवस्था नहीं है।
राघव चड्ढा ने सवाल उठाया कि जब एयरलाइंस यात्रियों से हर छोटी गलती का पैसा वसूलती हैं, तो फिर देरी की जिम्मेदारी क्यों नहीं लेतीं?
क्या होना चाहिए समाधान?
राघव चड्ढा ने सुझाव दिया कि:
हर घंटे की फ्लाइट देरी पर तय मुआवजा राशि निर्धारित हो।
यात्रियों को सीधे उनके बैंक खाते या टिकट माध्यम से रिफंड मिले।
एयरलाइंस कंपनियों की जवाबदेही तय की जाए।
उनका मानना है कि इससे एयरलाइन कंपनियां समय की पाबंदी को लेकर अधिक जिम्मेदार बनेंगी और यात्रियों के साथ न्याय होगा।
हवाई यात्रियों के अधिकार पर नई बहस
इस मुद्दे के उठने के बाद सोशल मीडिया पर भी बहस तेज हो गई है। कई यात्रियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि देरी के कारण उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ा, लेकिन एयरलाइंस की ओर से कोई ठोस सहायता नहीं मिली। अब सवाल यह है कि क्या सरकार इस दिशा में कोई नई नीति बनाएगी?







