‘समानता नियम 2026’: कहा– भाषा अस्पष्ट, दुरुपयोग की आशंका

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सुप्रीम कोर्ट ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टिट्यूशंस रेगुलेशंस, 2026 पर अस्थायी रोक लगा दी है। अदालत ने कहा कि प्रथम दृष्टया इन नियमों की भाषा अस्पष्ट है और इनके दुरुपयोग की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
कोर्ट ने केंद्र सरकार से इन नियमों की समीक्षा करने को कहा है और तब तक इन्हें लागू न करने का आदेश दिया है।
CJI की टिप्पणी: “भाषा में स्पष्टता नहीं”
मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने कहा कि नियमों की भाषा इतनी स्पष्ट नहीं है कि उनका निष्पक्ष और संतुलित उपयोग सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने सॉलिसिटर जनरल से सुझाव दिया कि प्रतिष्ठित और निष्पक्ष विशेषज्ञों की एक समिति गठित की जाए, जो नियमों की समीक्षा कर सके।
2012 से 2026 तक नियमों का विवाद
वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह ने अदालत को बताया कि 2019 से 2012 के UGC रेगुलेशन को चुनौती देने वाली याचिका लंबित थी, जिसे अब 2026 के नए नियमों से बदल दिया गया है। इस पर CJI ने स्पष्ट किया कि अदालत पुराने नियमों की तुलना में नए नियमों की संवैधानिक वैधता पर ही विचार करेगी।
जाति आधारित भेदभाव पर अदालत की चिंता
न्यायमूर्ति बागची ने कहा कि संविधान का अनुच्छेद 15(4) राज्यों को विशेष कानून बनाने का अधिकार देता है, लेकिन सवाल यह है कि प्रगतिशील कानूनों में प्रतिगामी रुख क्यों दिखाई दे रहा है। उन्होंने अमेरिका में नस्लीय आधार पर अलग-अलग स्कूलों का उदाहरण देते हुए बताया कि भारत उस दिशा में नहीं बढ़ना चाहिए।
UGC के नए ‘प्रमोशन ऑफ इक्विटी नियम 2026’ क्या हैं?
UGC के नए नियमों के तहत:
हर विश्वविद्यालय और कॉलेज में समान अवसर केंद्र (Equal Opportunity Centre) बनाना अनिवार्य है।
SC, ST, OBC, दिव्यांग और महिला प्रतिनिधियों को इसमें शामिल किया जाएगा।
यह केंद्र भेदभाव से जुड़ी शिकायतों, कानूनी सहायता और प्रशासनिक समन्वय का कार्य करेगा।
हालांकि आलोचकों का कहना है कि नियम सामान्य वर्ग के छात्रों की सुरक्षा को स्पष्ट रूप से परिभाषित नहीं करते।
सोशल मीडिया पर क्यों मचा बवाल?
UGC नियमों के खिलाफ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर #ShameOnUGC और #RollbackUGC ट्रेंड करने लगे। कई यूज़र्स ने आरोप लगाया कि ये नियम सामान्य वर्ग के छात्रों को ‘नेचुरली गिल्टी’ मानते हैं और झूठी शिकायतों से बचाव का कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं देते।
16 दिनों में सड़क से सुप्रीम कोर्ट तक कैसे पहुंचा मामला
13 जनवरी 2026 को नियम लागू होने के बाद:
कैंपसों में विरोध शुरू हुआ,
सोशल मीडिया पर अभियान चला,
कई शहरों में प्रदर्शन हुए,
प्रशासनिक इस्तीफे तक हुए,
और अंततः मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से जवाब मांगा है और अगली सुनवाई 19 फरवरी को तय की है। कोर्ट के रुख से साफ है कि यह मामला अब सिर्फ UGC नियमों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि संविधान, समानता और सामाजिक संतुलन का बड़ा प्रश्न बन चुका है।







