बरगी डैम क्रूज़ हादसा: 72 साल के रियाज़ हुसैन 3 घंटे तक मौत से जूझते रहे
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मध्य प्रदेश के जबलपुर स्थित बरगी डैम में हुआ दर्दनाक क्रूज़ हादसा पूरे प्रदेश को गहरे सदमे में डाल गया है। 30 अप्रैल की शाम हुए इस हादसे में कई परिवारों की खुशियां पल भर में मातम में बदल गईं। यह हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि सुरक्षा व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े करता है। जैसे-जैसे रेस्क्यू ऑपरेशन आगे बढ़ रहा है, हादसे की भयावहता सामने आती जा रही है।
3 घंटे तक मौत से जंग: रियाज़ हुसैन की दिल दहला देने वाली कहानी
इस हादसे के बीच एक चमत्कारी कहानी भी सामने आई है। 72 वर्षीय रियाज़ हुसैन करीब 3 घंटे तक डूबते क्रूज़ के अंदर फंसे रहे। उनके गले तक पानी भर चुका था और सांस लेना मुश्किल हो गया था। हर पल मौत करीब आ रही थी, लेकिन रेस्क्यू टीम की सतर्कता और हिम्मत ने उन्हें सुरक्षित बाहर निकाल लिया। यह घटना जहां एक ओर उम्मीद जगाती है, वहीं हादसे की भयावहता को भी उजागर करती है।
बच्चों की मौत ने बढ़ाया दर्द, 48 घंटे बाद मिले शव
हादसे के 48 घंटे बाद रेस्क्यू टीम को दो मासूम बच्चों के शव बरामद हुए, जिससे मृतकों की संख्या बढ़कर 11 हो गई। मृतकों में 6 वर्षीय विराज सोनी और तमिल भी शामिल हैं। इससे पहले एक 4 साल का मासूम भी अपनी जान गंवा चुका है। इस दर्दनाक घटना ने हर किसी की आंखें नम कर दी हैं।
तीसरे दिन भी जारी सर्च ऑपरेशन
रेस्क्यू टीम लगातार तीसरे दिन भी सर्च ऑपरेशन में जुटी हुई है। प्रशासन के अनुसार अभी भी कुछ लोग लापता हैं, जिनकी तलाश जारी है। घटनास्थल पर सुरक्षा और निगरानी बढ़ा दी गई है ताकि आगे कोई और अनहोनी न हो।
कैसे हुआ हादसा? मौसम और लापरवाही पर उठे सवाल
यह हादसा जबलपुर से करीब 45 किलोमीटर दूर नर्मदा नदी पर बने बरगी बांध के बैकवाटर क्षेत्र में हुआ। चश्मदीदों के अनुसार, अचानक मौसम खराब हो गया और तेज हवाओं के कारण ऊंची लहरें उठने लगीं। यात्रियों ने घबराकर किनारे लगाने की गुहार लगाई, लेकिन इसी बीच अफरा-तफरी मच गई।
लाइफ जैकेट को लेकर भी अव्यवस्था देखने को मिली, जिससे स्थिति और बिगड़ गई और क्रूज़ संतुलन खो बैठा।
भावुक हुए राकेश सिंह, पीड़ितों से की मुलाकात
मध्य प्रदेश सरकार में मंत्री राकेश सिंह हादसे की खबर मिलते ही दिल्ली से जबलपुर पहुंचे और मौके पर डटे रहे। उन्होंने रेस्क्यू ऑपरेशन का जायजा लिया और पीड़ित परिवारों से मिलकर उन्हें हर संभव मदद और निष्पक्ष जांच का भरोसा दिलाया। मृतकों के शव बाहर निकाले जाने के दौरान वे भावुक नजर आए।
सोचने पर मजबूर करता हादसा
यह घटना एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करती है कि क्या हमारी पर्यटन और जल सुरक्षा व्यवस्थाएं पर्याप्त हैं? क्या मौसम की चेतावनियों को नजरअंदाज किया जा रहा है? इस हादसे ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं, जिनके जवाब अब जांच के बाद ही सामने आएंगे।
प्रत्यक्षदर्शी का दर्द
"जैसे ही क्रूज पलटा, मैं किसी तरह पत्नी के साथ बाहर निकल पाया। साढ़े तीन घंटे तक हम बच्चे को ढूंढते रहे। हमने उम्मीद छोड़ दी थी, लेकिन वो मिल गया। आज उसका जन्मदिन है… ये दिन कभी नहीं भूलेंगे।"

