पटना में सफाई कर्मचारियों की हड़ताल: 3 मांगों पर बनी सहमति, फिर भी जारी आंदोलनराजधानी पटना में सफाई कर्मचारियों की हड़ताल के कारण शहर की सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। नगर निकाय के सफाई कर्मियों और दैनिक मजदूरों की हड़ताल लगातार 8वें दिन भी जारी रही, जिसके चलते सड़कों, गलियों, बाजारों और मोहल्लों में कूड़े के ढेर जमा हो गए हैं। बदबू और गंदगी से परेशान लोग अब सवाल उठा रहे हैं कि आखिर सफाई व्यवस्था कब सामान्य होगी। सफाई कर्मचारियों की 3 मांगों पर बनी सहमति पटना नगर निगम और सफाई कर्मचारियों के बीच बातचीत के बाद तीन प्रमुख मांगों पर सहमति बनी है।बुधवार शाम मेयर सीता साहू की अध्यक्षता में हुई बैठक में कर्मचारियों की मांगों पर विस्तार से चर्चा की गई।बैठक के बाद नगर निगम ने तीनों मांगों को मंजूरी देते हुए प्रस्ताव सरकार को भेजने का फैसला किया है।नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि बातचीत सकारात्मक रही है।अब अंतिम निर्णय राज्य सरकार के स्तर पर लिया जाएगा।इसके बाद ही हड़ताल खत्म होने की उम्मीद जताई जा रही है। आउटसोर्सिंग व्यवस्था खत्म करने की मांग सफाई कर्मचारियों की पहली बड़ी मांग नगर निकायों में आउटसोर्सिंग व्यवस्था समाप्त करने की है।कर्मचारियों का आरोप है कि निजी एजेंसियों के जरिए काम कराने से उनका शोषण हो रहा है।उनका कहना है कि सफाई का काम स्थायी प्रकृति का है, इसलिए इसे सरकारी कर्मचारियों के माध्यम से कराया जाना चाहिए।नगर निगम नेसरकार से नियमितीकरण प्रक्रिया शुरू करने की अनुमति मांगने का फैसला किया है।यदि सरकार अनुमति देती है तो कर्मचारियों को राहत मिल सकती है।इस मुद्दे पर अंतिम फैसला सरकार को करना है। स्थायी कर्मचारी का दर्जा और वेतन समानता की मांग सफाई कर्मचारियों की दूसरी प्रमुख मांग सभी दैनिक कर्मियों को स्थायी सरकारी कर्मचारी का दर्जा देने की है।कर्मचारियों का कहना है कि पहले भी कई सफाई कर्मियों को नियमित किया गया है।उन्होंने मांग की है कि बाकी कर्मचारियों को भी समान अवसर दिया जाए।इसके अलावा समान वेतन लागू करने की मांग भी आंदोलन का प्रमुख हिस्सा है।कर्मचारी एसीपी और एमएसीपी जैसी लंबित प्रक्रियाओं को लागू करने की मांग कर रहे हैं।नगर निगम ने इन मुद्दों पर सरकार को पत्र भेजने की बात कही है।