भोपाल किसान आंदोलन से थमी राजधानी की रफ्तार: कई किलोमीटर लंबा ट्रैफिक जाममध्य प्रदेश में न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर ग्रीष्मकालीन मूंग की शत-प्रतिशत खरीदी, खाद की समय पर उपलब्धता और ई-टोकन व्यवस्था समाप्त करने की मांग को लेकर हजारों किसान राजधानी भोपाल पहुंचे। संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले नर्मदापुरम सहित कई जिलों से किसान ट्रैक्टर-ट्रॉलियों और जरूरी सामान के साथ राजधानी पहुंचे। आंदोलन के चलते कई प्रमुख मार्गों पर यातायात प्रभावित रहा। सरकार और किसान संगठनों के बीच बातचीत के बाद आंदोलन समाप्त कर दिया गया। बैरिकेडिंग तोड़ने की कोशिश, राजधानी में सुरक्षा बढ़ाई गई किसानों को राजधानी में प्रवेश से रोकने के लिए पुलिस ने होशंगाबाद रोड, सावरकर सेतु और अन्य प्रवेश मार्गों पर बहुस्तरीय बैरिकेडिंग की थी। प्रदर्शन के दौरान कुछ स्थानों पर किसानों ने बैरिकेड हटाने और आगे बढ़ने की कोशिश की। पुलिस और प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित करते हुए अतिरिक्त बल तैनात किया। पूरे घटनाक्रम के दौरान सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रही और अधिकारियों ने लगातार किसानों से बातचीत जारी रखी। हाईवे से कॉलोनियों तक लगा लंबा ट्रैफिक जाम किसान आंदोलन के कारण भोपाल-नर्मदापुरम मार्ग, मिसरोद, होशंगाबाद रोड और आसपास के कई इलाकों में लंबा जाम लग गया। मुख्य मार्ग बंद होने से वाहनों का दबाव अंदरूनी सड़कों पर बढ़ गया, जिससे कटारा हिल्स, बागसेवनिया और आसपास की कॉलोनियों में भी यातायात प्रभावित हुआ। कई कार्यालय जाने वाले लोग और आम नागरिक घंटों तक जाम में फंसे रहे। कुछ स्कूलों ने एहतियातन समय से पहले छुट्टी भी घोषित की। एम्स कॉरिडोर भी प्रभावित, मरीजों को हुई परेशानी आंदोलन का असर भोपाल के एम्स कॉरिडोर तक पहुंचा। डायवर्जन लागू होने और भारी ट्रैफिक के कारण एम्बुलेंस तथा मरीजों को अस्पताल तक पहुंचने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। प्रशासन ने वैकल्पिक मार्गों की व्यवस्था की, लेकिन वाहनों के अधिक दबाव के चलते कई रास्तों पर भी जाम की स्थिति बनी रही। पुलिस लगातार ट्रैफिक को सुचारु करने में जुटी रही।