जंतर-मंतर हिंसा की जांच के लिए बनेगी कमेटी: जंतर-मंतर हिंसा पर सुप्रीम कोर्ट सख्तसुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुई हिंसा और पुलिस कार्रवाई के आरोपों की जांच के लिए स्वतंत्र हाई पावर्ड कमेटी गठित करने का आदेश दिया है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान यह निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष और तथ्यात्मक जांच जरूरी है। कमेटी प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई और पुलिसकर्मियों पर हुए हमलों से जुड़े आरोपों की भी जांच करेगी। जांच का उद्देश्य घटनाक्रम से जुड़े वास्तविक तथ्यों को सामने लाना और जिम्मेदारी तय करने में मदद करना है। कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई को लेकर अदालत फैसला करेगी। तीन सदस्यीय स्वतंत्र कमेटी करेगी पड़ताल सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार जांच कमेटी में तीन वरिष्ठ सदस्य शामिल होंगे। कमेटी की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के एक पूर्व न्यायाधीश द्वारा की जाएगी। इसके अलावा किसी हाई कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश को भी कमेटी में शामिल किया जाएगा। तीसरे सदस्य के तौर पर एक सेवानिवृत्त वरिष्ठ पुलिस अधिकारी को जिम्मेदारी दी जाएगी। यह समिति पूरे मामले से जुड़े तथ्यों और आरोपों की स्वतंत्र रूप से पड़ताल करेगी। अदालत ने कमेटी से निष्पक्ष तरीके से जांच कर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है। पुलिस बर्बरता और हमले के आरोपों की होगी जांच हाई पावर्ड कमेटी जंतर-मंतर पर हुए 'संसद चलो' मार्च के दौरान सामने आए आरोपों की तथ्यात्मक जांच करेगी। प्रदर्शनकारियों की ओर से पुलिस पर अत्यधिक बल प्रयोग और कथित बर्बरता के आरोप लगाए गए हैं। वहीं पुलिस की ओर से प्रदर्शनकारियों द्वारा बैरिकेड्स तोड़ने और पुलिसकर्मियों पर हमला करने की बात कही गई है। इसी विवाद को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने स्वतंत्र जांच की जरूरत महसूस की है। कमेटी दोनों पक्षों के दावों और घटनाक्रम से जुड़े तथ्यों की जांच करेगी। जांच के बाद सामने आने वाली रिपोर्ट से पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट होने की उम्मीद है।