सदैव सत्य का ओपिनियन सर्वे निकला सटीक: दतिया में कांग्रेस की जीत, सर्वे ने पहले ही दिए थे संकेतदतिया उपचुनाव के नतीजों ने प्रदेश की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। चुनाव से पहले भाजपा के भीतर नाराजगी की अटकलें लगाई जा रही थीं। कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इसका असर मतदान पर भी दिखाई दिया। दूसरी ओर कांग्रेस ने महंगाई, बेरोजगारी, युवाओं और छात्र हितों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। लगातार जनसंपर्क और आंदोलनों के जरिए कांग्रेस ने अपनी मौजूदगी मजबूत करने का प्रयास किया। दामोदर यादव को मिले वोटों को भी चुनावी समीकरण का अहम हिस्सा माना जा रहा है। हालांकि, इन सभी कारणों को लेकर अलग-अलग राजनीतिक विश्लेषण सामने आ रहे हैं। इससे पूर्व सदैव सत्य की टीम ने चुनावी ओपिनियन के आधार पर यह अंदेशा लगाया था, कांग्रेस अपना खाता खुलेगी और वही सच साबित हुआ |जिस प्रकार पूर्व में बहुत सारे लोग भाजपा से नाराज थे वहीं दूसरी ओर कुछ समर्थक जो नरोत्तम मिश्रा गुट के थे, वह भी नाराज थे। जिस वजह से इसका फायदा कांग्रेस को हुआ है एवं जिस प्रकार छात्र हित के जो विषय थे, उस विषय को लेकर कहीं ना कहीं लोगों ने भी कांग्रेस उम्मीदवार को‌ मौका दिया है। जानिए क्या है वजह? क्या नरोत्तम मिश्रा फैक्टर बना भाजपा की हार का कारण? दतिया उपचुनाव के बाद पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा का नाम राजनीतिक चर्चाओं में बना हुआ है। चुनाव से पहले उनके समर्थकों की नाराजगी की खबरें सामने आई थीं। कुछ जानकारों का मानना है कि इसका असर भाजपा के प्रदर्शन पर पड़ा। वहीं कांग्रेस ने स्थानीय और जनहित के मुद्दों को लगातार उठाया। युवाओं और छात्रों से जुड़े विषयों को भी चुनाव प्रचार का हिस्सा बनाया गया। इससे कांग्रेस को राजनीतिक बढ़त मिलने की चर्चा है। हालांकि, इस पर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।