21 साल बाद दिल्ली वापसी: राज्यसभा पहुंचे Nitish Kumar

राज्यसभा पहुंचे Nitish Kumar

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बिहार की राजनीति के सबसे प्रभावशाली चेहरों में से एक Nitish Kumar ने दो दशक बाद फिर से दिल्ली की सियासत में कदम रख दिया है। वर्ष 2005 में लोकसभा सांसद पद छोड़कर बिहार के मुख्यमंत्री बने नीतीश कुमार अब राज्यसभा सांसद बनकर राष्ट्रीय राजनीति में लौट आए हैं। उन्होंने शपथ लेने के बाद साफ संकेत दिए हैं कि वे जल्द ही मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे सकते हैं।

CM पद छोड़ने के संकेत, नए नेतृत्व की तैयारी

दिल्ली में मीडिया से बातचीत करते हुए नीतीश कुमार ने कहा कि उन्होंने बिहार में लंबे समय तक काम किया है और अब वे दिल्ली में सक्रिय भूमिका निभाना चाहते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि 3-4 दिनों में इस्तीफा देकर नए मुख्यमंत्री और मंत्रिमंडल के गठन का रास्ता साफ करेंगे।

चारों सदनों का सदस्य बनने का अनोखा रिकॉर्ड

नीतीश कुमार भारतीय राजनीति के उन चुनिंदा नेताओं में शामिल हो गए हैं, जिन्होंने संसद और विधानसभा—दोनों के उच्च और निचले सदनों की सदस्यता हासिल की है। वे लोकसभा और राज्यसभा के साथ-साथ बिहार विधानसभा और विधान परिषद के भी सदस्य रह चुके हैं।

सांसद रहते हुए भी बने मुख्यमंत्री

नीतीश कुमार का राजनीतिक करियर बेहद दिलचस्प रहा है। वे 1989 से 2005 तक लगातार लोकसभा सांसद रहे और इसी दौरान 2000 में पहली बार मुख्यमंत्री बने, हालांकि बहुमत साबित न कर पाने के कारण उन्हें इस्तीफा देना पड़ा।

इसके बाद 2005 में दोबारा मुख्यमंत्री बने और तब से बिहार की राजनीति का केंद्र बने रहे।

सुशासन बाबू’ का दौर और विकास की राजनीति

2005 से 2013 तक का समय नीतीश कुमार के लिए स्वर्णिम दौर माना जाता है। इस दौरान उन्होंने बिहार में सड़क, शिक्षा और कानून व्यवस्था में सुधार कर ‘सुशासन बाबू’ की छवि बनाई।

गठबंधन की राजनीति और बार-बार यू-टर्न

नीतीश कुमार की राजनीति में कई बड़े मोड़ आए—

2013 में NDA छोड़कर अलग रास्ता,

2015 में लालू प्रसाद यादव के साथ महागठबंधन,

2017 में फिर NDA में वापसी,

2022 में दोबारा गठबंधन बदला,

2024 में फिर NDA में वापसी,

इन लगातार बदलावों ने उन्हें भारतीय राजनीति का सबसे अप्रत्याशित नेता बना दिया।

दिल्ली में क्या होगा नीतीश कुमार का रोल?

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि दिल्ली में नीतीश कुमार की भूमिका क्या होगी। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि वे NDA में एक वरिष्ठ और संतुलित चेहरा बनकर उभर सकते हैं।

संभावना यह भी जताई जा रही है कि उन्हें NDA का संयोजक बनाया जा सकता है या केंद्र सरकार में अहम जिम्मेदारी मिल सकती है।

‘दिल्ली से पटना और फिर दिल्ली’ – एक अनोखा सफर

नीतीश कुमार का राजनीतिक सफर किसी रोलर-कोस्टर से कम नहीं रहा।

2003-04: केंद्र में रेल मंत्री,

2005: बिहार के मुख्यमंत्री बने,

2026: फिर दिल्ली वापसी राज्यसभा के जरिए,

21 साल बाद वे वहीं लौट आए हैं, जहां से उन्होंने अपनी बड़ी राजनीतिक यात्रा शुरू की थी।

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