असम में सियासी घमासान: Himanta Biswa Sarma का Pawan Khera पर तीखा हमला
Payal jadon
0 सेकंड पहलेPehli baar itni sach khabar padhi, shukriya!
Ishaan Tiwari
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असम की राजनीति एक बार फिर बयानबाजी के कारण सुर्खियों में आ गई है। मुख्यमंत्री Himanta Biswa Sarma ने कांग्रेस नेता Pawan Khera पर तीखा हमला करते हुए ऐसा बयान दिया है, जिसने पूरे राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है। अपने संबोधन में सरमा ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का जिक्र करते हुए कहा कि खेड़ा को असम के थाने में हाजिरी लगानी होगी और आने वाले समय में क्या होगा, यह देखने लायक होगा। उनका चर्चित बयान—“आगे-आगे आप फिल्म देखते रहो”—राजनीतिक संदेश और चेतावनी दोनों के रूप में देखा जा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट की भूमिका और कानूनी प्रक्रिया
यह मामला केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं है, बल्कि कानूनी रूप से भी महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुंच चुका है। सुप्रीम कोर्ट ने Pawan Khera को असम पुलिस द्वारा दर्ज FIR के मामले में अंतरिम अग्रिम जमानत दी है। साथ ही कोर्ट ने उन्हें जांच में सहयोग करने और जरूरत पड़ने पर असम के थाने में पेश होने का निर्देश दिया है। हालांकि, अदालत ने मुख्यमंत्री सरमा की कुछ टिप्पणियों को ‘अंससदीय’ भी बताया और संकेत दिया कि मामला राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता से प्रेरित हो सकता है।
महिलाओं के सम्मान का मुद्दा बना केंद्र
मुख्यमंत्री सरमा ने इस विवाद को असम की महिलाओं के सम्मान से जोड़ते हुए कहा कि Pawan Khera की टिप्पणी केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि पूरे राज्य की बेटियों का अपमान है। उन्होंने आरोप लगाया कि खेड़ा ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर एक महिला के चरित्र पर सवाल उठाए, जो गंभीर अपराध है। सरमा ने जोर देकर कहा कि दोषियों को सजा जरूर मिलेगी।
आरोप-प्रत्यारोप से तेज हुआ राजनीतिक संघर्ष
इस पूरे विवाद की शुरुआत कथित तौर पर Pawan Khera द्वारा सरमा की पत्नी को लेकर की गई टिप्पणियों से हुई थी, जिसके बाद असम पुलिस ने उनके खिलाफ मामला दर्ज किया। अब यह मुद्दा राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर गहराता जा रहा है। एक तरफ कांग्रेस और भाजपा के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है, वहीं दूसरी ओर कोर्ट में सुनवाई भी जारी है।
आगे क्या? बढ़ सकता है विवाद
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह विवाद और गहरा सकता है। दोनों पक्ष अपने-अपने रुख पर अडिग हैं और इस मुद्दे को राजनीतिक लाभ के नजरिए से भी देखा जा रहा है। असम की राजनीति में यह मामला आने वाले समय में बड़ा मुद्दा बन सकता है।



