सुप्रीम कोर्ट से पवन खेड़ा को बड़ी राहत: असम विवादित बयान मामले में मिली अग्रिम जमानत

Myra Dubey
0 सेकंड पहलेSarkar ko iske baare mein kuch karna chahiye!
Pranav Srivastava
0 सेकंड पहलेNeta ji ko yeh khabar zaroor dikhni chahiye!
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी से जुड़े मामले में उन्हें अग्रिम जमानत दे दी है। न्यायमूर्ति जे.के. माहेश्वरी और न्यायमूर्ति ए.एस. चंदुरकर की पीठ ने यह आदेश कुछ सख्त शर्तों के साथ जारी किया। अदालत का आदेश शुक्रवार को आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड किया गया।
सुप्रीम कोर्ट ने लगाईं सख्त शर्तें
अदालत ने स्पष्ट किया कि पवन खेड़ा को जांच में पूरा सहयोग करना होगा। उन्हें जांच अधिकारी द्वारा बुलाए जाने पर थाने में पेश होना अनिवार्य होगा। साथ ही, कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि वे किसी भी तरह से साक्ष्यों को प्रभावित या उनके साथ छेड़छाड़ नहीं करेंगे।
सबसे महत्वपूर्ण शर्त यह है कि खेड़ा बिना संबंधित अदालत की अनुमति के देश छोड़कर विदेश यात्रा नहीं कर सकते। ट्रायल कोर्ट को यह अधिकार भी दिया गया है कि वह आवश्यकता अनुसार अतिरिक्त शर्तें जोड़ सकता है।
गुवाहाटी हाई कोर्ट के आदेश पर सवाल
सुप्रीम कोर्ट ने गुवाहाटी हाई कोर्ट के 24 अप्रैल के उस आदेश को खारिज कर दिया, जिसमें खेड़ा की अग्रिम जमानत याचिका ठुकरा दी गई थी। शीर्ष अदालत ने कहा कि हाई कोर्ट की टिप्पणियां उपलब्ध तथ्यों के सही मूल्यांकन पर आधारित नहीं थीं और आरोपी पर सबूत का बोझ डालना उचित नहीं था। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि बिना स्पष्ट अपराध स्थापित किए केवल बयानों के आधार पर गंभीर टिप्पणी करना न्यायसंगत नहीं है।
सुनवाई के दौरान तीखी बहस
सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस देखने को मिली। पवन खेड़ा की ओर से वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने इसे “अभूतपूर्व मामला” बताया और कहा कि यह अधिकतम मानहानि से जुड़ा मामला है, जिसमें गिरफ्तारी की आवश्यकता नहीं है।
वहीं, सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी कि मामले में पेश किए गए दस्तावेजों और तस्वीरों के स्रोत का पता लगाने के लिए हिरासत में पूछताछ जरूरी है।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला 4 अप्रैल को हुई एक प्रेस कॉन्फ्रेंस से जुड़ा है, जिसमें पवन खेड़ा ने आरोप लगाया था कि असम के मुख्यमंत्री की पत्नी के पास कई पासपोर्ट हैं और विदेशों में अघोषित संपत्तियां हैं।
इन आरोपों को रिनिकी भुइयां सरमा ने पूरी तरह खारिज करते हुए इन्हें “AI-जनित और मनगढ़ंत” बताया था। इसके बाद उनके द्वारा गुवाहाटी क्राइम ब्रांच में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कराया गया।
सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि यह मामला पहली नजर में राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता से प्रेरित प्रतीत होता है। अदालत ने यह भी कहा कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता (Article 21) को हल्के में नहीं लिया जा सकता और जांच तथा व्यक्ति के अधिकारों के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है।
मामले की वर्तमान स्थिति
सुप्रीम कोर्ट से राहत मिलने के बाद अब पवन खेड़ा को गिरफ्तारी से सुरक्षा मिल गई है, लेकिन मामले की जांच और सुनवाई जारी रहेगी। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि जमानत के दौरान प्रस्तुत दस्तावेजों या टिप्पणियों का अंतिम फैसले पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।






