राष्ट्रपति भवन के तिरंगे में छिपा है खास संदेश: भवन पर तिरंगा कभी फुल मास्ट तो कभी हाफ मास्ट क्यों?
भारत के राष्ट्रपति भवन पर लहराता तिरंगा सिर्फ देश का राष्ट्रीय ध्वज नहीं, बल्कि राष्ट्र की भावनाओं, संवैधानिक व्यवस्था और सरकारी प्रोटोकॉल का प्रतीक भी है। आमतौर पर लोग तिरंगे को सिर्फ लहराते हुए देखते हैं, लेकिन उसका फुल मास्ट, हाफ मास्ट या बिल्कुल न होना अपने आप में कई महत्वपूर्ण संदेश देता है। यही वजह है कि UPSC इंटरव्यू समेत कई प्रतियोगी परीक्षाओं में इससे जुड़े सवाल पूछे जाते हैं। फुल मास्ट क्या होता है? जब तिरंगे को मस्तूल के सबसे ऊपरी हिस्से तक पूरी ऊंचाई पर फहराया जाता है, तो इसे “फुल मास्ट” कहा जाता है। यह सामान्य स्थिति होती है और राष्ट्रीय गौरव, स्वतंत्रता और सम्मान का प्रतीक मानी जाती है। राष्ट्रपति भवन पर ज्यादातर दिनों में तिरंगा इसी स्थिति में दिखाई देता है। इसका यह भी संकेत होता है कि भारत के राष्ट्रपति, राष्ट्रपति भवन में मौजूद हैं। हाफ मास्ट क्यों किया जाता है? जब तिरंगे को मस्तूल के बीच तक झुकाकर फहराया जाता है, तो उसे “हाफ मास्ट” कहा जाता है। यह राष्ट्रीय शोक का प्रतीक होता है। भारत सरकार के फ्लैग कोड के अनुसार राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, लोकसभा स्पीकर और भारत के मुख्य न्यायाधीश जैसे उच्च पदों पर बैठे व्यक्तियों के निधन पर पूरे देश में झंडा हाफ मास्ट किया जाता है। राज्य स्तर पर मुख्यमंत्री या राज्यपाल के निधन की स्थिति में संबंधित राज्य में राष्ट्रीय ध्वज आधा झुकाया जाता है। कई बार विदेशी गणमान्य व्यक्तियों के निधन पर भी केंद्र सरकार के निर्देश के अनुसार ऐसा किया जाता है।