कोलकाता के स्कूल में ‘तौलिया डांस’ पर बवाल: छात्राओं की परफॉर्मेंस से उठे शिक्षा और संस्कार पर सवाल

छात्राओं की परफॉर्मेंस से उठे शिक्षा और संस्कार पर सवाल

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पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के एक प्रतिष्ठित CBSE स्कूल में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम का एक वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में दो छात्राएं स्टेज पर ‘तौलिया’ लपेटकर डांस करती नजर आ रही हैं, जिससे शिक्षा व्यवस्था और स्कूल प्रशासन की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

बॉलीवुड गाने पर दी गई परफॉर्मेंस
वायरल वीडियो में छात्राएं दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे के लोकप्रिय गीत “मेरे ख्वाबों में जो आए” पर नृत्य करती दिख रही हैं। इस गाने में अभिनेत्री काजोल द्वारा पहने गए तौलिया स्टाइल को ही छात्राओं ने मंच पर दोहराया, जो अब विवाद का कारण बन गया है।

सोशल मीडिया पर बंटी राय
वीडियो सामने आने के बाद इंटरनेट पर लोगों की राय दो हिस्सों में बंट गई है—
विरोध करने वाले: कई यूजर्स ने इस प्रस्तुति को “अश्लील”, “अभद्र” और “स्कूल की मर्यादा के खिलाफ” बताया। उनका कहना है कि शैक्षणिक संस्थानों में इस तरह की गतिविधियां बच्चों के संस्कार और मानसिकता पर गलत असर डाल सकती हैं।
समर्थन करने वाले: वहीं कुछ लोगों ने इसे सिर्फ एक क्रिएटिव परफॉर्मेंस बताया और कहा कि इसे अनावश्यक रूप से बड़ा मुद्दा बनाया जा रहा है।

स्कूल प्रशासन पर उठे सवाल
वीडियो में मंच के सामने बड़ी संख्या में छात्र, शिक्षक और अभिभावक मौजूद दिख रहे हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि—
क्या इस प्रस्तुति की पूर्व अनुमति दी गई थी?
क्या स्कूल प्रशासन ने कार्यक्रम की सामग्री की समीक्षा की थी?
आलोचकों का कहना है कि यह “पर्यवेक्षण की कमी” और “प्रशासनिक लापरवाही” का उदाहरण है।

NHRC का हस्तक्षेप
मामले ने तूल पकड़ने के बाद राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने इस पर संज्ञान लिया है। शिकायत मिलने के बाद आयोग ने स्कूल को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि— इस तरह की प्रस्तुति बच्चों की गरिमा और मानसिक विकास पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है, स्कूलों में ऐसे कार्यक्रमों के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश होने चाहिए

देशभर में गाइडलाइंस की मांग
इस विवाद के बाद यह मांग भी तेज हो गई है कि— देशभर के स्कूलों के लिए सांस्कृतिक कार्यक्रमों को लेकर सख्त गाइडलाइंस बनाई जाएं, नाबालिगों की प्रस्तुति में “उचित परिधान और सामग्री” सुनिश्चित की जाए |

शिक्षा बनाम मनोरंजन: बड़ा सवाल
यह घटना एक बड़े सवाल को जन्म देती है— क्या स्कूलों में मनोरंजन और रचनात्मकता के नाम पर सीमाएं पार हो रही हैं?
विशेषज्ञों का मानना है कि— स्कूल केवल शिक्षा ही नहीं, बल्कि संस्कार देने का भी केंद्र होते हैं, ऐसे में कार्यक्रमों का चयन बेहद सावधानी से किया जाना चाहिए,

कोलकाता का यह मामला सिर्फ एक वायरल वीडियो नहीं, बल्कि शिक्षा प्रणाली, सांस्कृतिक मूल्यों और आधुनिक अभिव्यक्ति के बीच संतुलन पर छिड़ी बहस का प्रतीक बन चुका है। अब सभी की नजरें NHRC की कार्रवाई और स्कूल प्रशासन के जवाब पर टिकी हैं।

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