राष्ट्रपति भवन के तिरंगे में छिपा है खास संदेश: भवन पर तिरंगा कभी फुल मास्ट तो कभी हाफ मास्ट क्यों?

Pranav Srivastava
1 महीने पहलेHar Hindustani ko yeh padhna aur samajhna chahiye.
Monika Das
1 महीने पहलेDesh ke liye yeh ek mahatvapurna khabar hai.
Aarohi Chaudhary
1 महीने पहलेHamara desh sahi direction mein ja raha hai, umeed hai.
Nidhi kumari
1 महीने पहलेJai Hind! Desh pahle, baaki sab baad mein.
Navya Nair
1 महीने पहलेBharat Mata ki Jai! Yeh khabar garv dilati hai.
भारत के राष्ट्रपति भवन पर लहराता तिरंगा सिर्फ देश का राष्ट्रीय ध्वज नहीं, बल्कि राष्ट्र की भावनाओं, संवैधानिक व्यवस्था और सरकारी प्रोटोकॉल का प्रतीक भी है। आमतौर पर लोग तिरंगे को सिर्फ लहराते हुए देखते हैं, लेकिन उसका फुल मास्ट, हाफ मास्ट या बिल्कुल न होना अपने आप में कई महत्वपूर्ण संदेश देता है। यही वजह है कि UPSC इंटरव्यू समेत कई प्रतियोगी परीक्षाओं में इससे जुड़े सवाल पूछे जाते हैं।
फुल मास्ट क्या होता है?
जब तिरंगे को मस्तूल के सबसे ऊपरी हिस्से तक पूरी ऊंचाई पर फहराया जाता है, तो इसे “फुल मास्ट” कहा जाता है। यह सामान्य स्थिति होती है और राष्ट्रीय गौरव, स्वतंत्रता और सम्मान का प्रतीक मानी जाती है। राष्ट्रपति भवन पर ज्यादातर दिनों में तिरंगा इसी स्थिति में दिखाई देता है। इसका यह भी संकेत होता है कि भारत के राष्ट्रपति, राष्ट्रपति भवन में मौजूद हैं।
हाफ मास्ट क्यों किया जाता है?
जब तिरंगे को मस्तूल के बीच तक झुकाकर फहराया जाता है, तो उसे “हाफ मास्ट” कहा जाता है। यह राष्ट्रीय शोक का प्रतीक होता है। भारत सरकार के फ्लैग कोड के अनुसार राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, लोकसभा स्पीकर और भारत के मुख्य न्यायाधीश जैसे उच्च पदों पर बैठे व्यक्तियों के निधन पर पूरे देश में झंडा हाफ मास्ट किया जाता है।
राज्य स्तर पर मुख्यमंत्री या राज्यपाल के निधन की स्थिति में संबंधित राज्य में राष्ट्रीय ध्वज आधा झुकाया जाता है। कई बार विदेशी गणमान्य व्यक्तियों के निधन पर भी केंद्र सरकार के निर्देश के अनुसार ऐसा किया जाता है।
राष्ट्रपति भवन पर कब नहीं होता झंडा?
प्रोटोकॉल के अनुसार यदि राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति मौजूद नहीं होते, तो कई बार भवन के शीर्ष से राष्ट्रीय ध्वज हटा दिया जाता है। यह राष्ट्रपति की अनुपस्थिति का संकेत माना जाता है।
हाफ मास्ट करने का प्रोटोकॉल क्या है?
राष्ट्रीय ध्वज को हाफ मास्ट करने का भी एक तय प्रोटोकॉल होता है। पहले झंडे को पूरी ऊंचाई तक ले जाया जाता है और उसके बाद धीरे-धीरे आधे रास्ते तक नीचे लाया जाता है। दिन समाप्त होने पर झंडे को दोबारा पूरी ऊंचाई तक उठाकर सम्मानपूर्वक उतारा जाता है।
15 अगस्त और 26 जनवरी में झंडा फहराने का अंतर
भारत में स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस पर झंडा फहराने के तरीके भी अलग होते हैं।
15 अगस्त – होस्टिंग
स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री लाल किले से तिरंगे को नीचे से ऊपर खींचकर फहराते हैं। इसे “होस्टिंग” कहा जाता है। यह भारत के गुलामी से आजादी तक पहुंचने का प्रतीक माना जाता है।
26 जनवरी – अनफर्लिंग
गणतंत्र दिवस पर राष्ट्रपति पहले से बंधे हुए झंडे को खोलते हैं, जिसे “अनफर्लिंग” कहा जाता है। यह इस बात का संकेत है कि भारत पहले से स्वतंत्र है और अब संविधान के तहत गणतंत्र के रूप में संचालित हो रहा है।
राष्ट्र की भावनाओं का प्रतीक है तिरंगा
राष्ट्रपति भवन पर लगा राष्ट्रीय ध्वज केवल एक कपड़ा नहीं, बल्कि भारत की एकता, सम्मान, शोक और संवैधानिक गरिमा का प्रतीक है। इसका फुल मास्ट या हाफ मास्ट होना पूरे देश और दुनिया को एक महत्वपूर्ण संदेश देता है।








