8वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर बनेगा गेमचेंजर: लेवल-1 से लेवल-18 तक सैलरी में संभावित बढ़ोतरी

लेवल-1 से लेवल-18 तक सैलरी में संभावित बढ़ोतरी

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नए साल 2026 की शुरुआत केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए बड़ी खुशखबरी लेकर आ सकती है। दरअसल, 31 दिसंबर 2025 को सातवें वेतन आयोग (7th Pay Commission) की अवधि समाप्त हो रही है और इसके बाद 1 जनवरी 2026 से आठवां वेतन आयोग (8th Pay Commission) लागू होने की संभावना है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पहले ही 8वें वेतन आयोग के Terms of Reference को मंजूरी दे चुकी है। ऐसे में देशभर के करीब 1.19 करोड़ केंद्रीय कर्मचारी और पेंशनर्स बेसब्री से नए वेतन ढांचे का इंतजार कर रहे हैं।

31 दिसंबर 2025 को खत्म होगा 7वां वेतन आयोग
जनवरी 2016 में लागू हुआ 7वां वेतन आयोग अब अपने अंतिम चरण में है। इसके औपचारिक रूप से खत्म होते ही 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू की जा सकती हैं। हालांकि, एक्सपर्ट्स का मानना है कि कागजों पर नया वेतनमान 1 जनवरी 2026 से लागू हो सकता है, लेकिन वास्तविक सैलरी और एरियर मिलने में कुछ समय लग सकता है।

फिटमेंट फैक्टर क्या होता है?
फिटमेंट फैक्टर एक मल्टीप्लायर होता है, जिससे मौजूदा बेसिक सैलरी को गुणा कर नई बेसिक सैलरी तय की जाती है। जितना ज्यादा फिटमेंट फैक्टर होगा, उतनी ज्यादा सैलरी और पेंशन में बढ़ोतरी होगी।
6th Pay Commission: 1.86
7th Pay Commission: 2.57
8th Pay Commission (अनुमान): 2.15 से 3.0

लेवल-1 से लेवल-18 तक होगा बड़ा फायदा
चपरासी (Level-1) से लेकर IAS (Level-18) तक सभी वर्ग के कर्मचारियों को फिटमेंट फैक्टर का लाभ मिलेगा। यही वजह है कि इसे अब तक की सबसे बड़ी सैलरी हाइक माना जा रहा है।

फिटमेंट फैक्टर किन बातों पर निर्भर करता है?
महंगाई और जीवन-यापन की लागत
CPI और CPI-IW के आंकड़े
सरकार की वित्तीय स्थिति
बजट और वेतन खर्च की सीमा
प्राइवेट सेक्टर से सैलरी तुलना

क्या मिलेगा एरियर?
अगर 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने में देरी होती है, तो कर्मचारियों को एरियर मिलने की पूरी संभावना है। यही वजह है कि जनवरी 2026 की तारीख को लेकर चर्चाएं तेज हैं।
कुल मिलाकर, अगर 8वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर 2.15 या उससे अधिक तय होता है, तो यह केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए ऐतिहासिक वेतन वृद्धि साबित हो सकती है। अब सबकी नजरें सरकार के अंतिम फैसले पर टिकी हैं।

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