जब देश की तिजोरी में थे सिर्फ 197 करोड़: इतिहास का अहम अध्याय

इतिहास का अहम अध्याय

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देश का आम बजट 1 फरवरी 2026 को संसद में पेश होने जा रहा है। हर साल की तरह इस बार भी आम आदमी, नौकरीपेशा वर्ग, किसान, महिलाएं और युवा बजट से बड़ी उम्मीदें लगाए बैठे हैं। टैक्स में राहत मिलेगी या नहीं, महंगाई पर काबू लगेगा या नहीं—इन तमाम सवालों के बीच बजट चर्चा का केंद्र बना हुआ है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आज़ाद भारत का पहला बजट कितना छोटा था?

आज जब 50 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा के बजट की बात होती है, तब यह जानकर हैरानी होती है कि स्वतंत्र भारत का पहला यूनियन बजट महज 197.29 करोड़ रुपये का था। यह ऐतिहासिक बजट 26 नवंबर 1947 को देश के पहले वित्त मंत्री सर आर.के. शनमुखम चेट्टी ने पेश किया था।

ब्रिटिश दौर से शुरू हुई बजट की परंपरा
बहुत कम लोग जानते हैं कि भारत में बजट की शुरुआत आज़ादी के बाद नहीं, बल्कि अंग्रेज़ों के शासनकाल में हुई थी। 7 अप्रैल 1860 को स्कॉटिश अर्थशास्त्री जेम्स विल्सन ने भारत का पहला बजट पेश किया था। उस समय बजट का उद्देश्य आम जनता की भलाई नहीं, बल्कि ब्रिटिश शासन की आर्थिक जरूरतें पूरी करना था।

विभाजन के दर्द के बीच पेश हुआ पहला यूनियन बजट
15 अगस्त 1947 को आज़ादी मिलने के बाद देश विभाजन की त्रासदी से गुजर रहा था। दंगे, विस्थापन, सीमाओं की सुरक्षा और आर्थिक अस्थिरता—ऐसे हालात में देश की अर्थव्यवस्था को संभालना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं था। इसी कारण पहला बजट पूरे साल के लिए नहीं, बल्कि केवल 15 अगस्त 1947 से 31 मार्च 1948 यानी साढ़े सात महीने के लिए तैयार किया गया था।

पहले बजट के अहम आंकड़े
कुल राजस्व (Revenue): 171.15 करोड़ रुपये,
कुल खर्च (Expenditure): 197.29 करोड़ रुपये,
राजकोषीय घाटा: 24.59 करोड़ रुपये,
रक्षा बजट: 92.74 करोड़ रुपये,
यानी कुल खर्च का करीब 46–50 प्रतिशत हिस्सा सिर्फ रक्षा पर खर्च हुआ, क्योंकि उस वक्त देश को सुरक्षा से जुड़ी गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा था।

तीन ऐतिहासिक परियोजनाएं, जिन्होंने बदली देश की दिशा
भले ही पहला बजट आकार में छोटा था, लेकिन इसमें देश के भविष्य को ध्यान में रखते हुए बड़े फैसले लिए गए। इस बजट में तीन ऐतिहासिक परियोजनाओं को मंजूरी मिली—
दामोदर वैली अथॉरिटी (Damodar Valley Project),
हीराकुंड बांध (Hirakud Dam),
भाखड़ा बांध (Bhakra Dam),
इन परियोजनाओं ने सिंचाई, बिजली उत्पादन और बाढ़ नियंत्रण के क्षेत्र में भारत के विकास को नई दिशा दी और आज भी ये देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानी जाती हैं।

आज और तब का फर्क
आज जब भारत ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी बनने की ओर बढ़ रहा है, तब 197 करोड़ रुपये का बजट सुनकर यकीन करना मुश्किल होता है। लेकिन यही वह नींव थी, जिस पर आज की मजबूत भारतीय अर्थव्यवस्था खड़ी है।

1 फरवरी 2026 को पेश होने वाले बजट से पहले, आज़ाद भारत के पहले बजट की यह कहानी हमें याद दिलाती है कि सीमित संसाधनों में भी दूरदर्शी फैसले देश का भविष्य बदल सकते हैं।

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