प्रयागराज माघ मेला 2026: प्रशासन बनाम संत परंपरा का टकराव

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प्रयागराज माघ मेला 2026 के दौरान एक बड़ा धार्मिक और कानूनी विवाद सामने आया है। माघ मेला प्राधिकरण ने ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को नोटिस जारी कर उनके नाम के आगे ‘शंकराचार्य’ लिखने पर सवाल उठाया है। नोटिस में सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामले का हवाला देते हुए 24 घंटे के भीतर जवाब मांगा गया है।
मौनी अमावस्या शोभायात्रा रोकने से गहराया विवाद
यह विवाद उस समय और गहरा गया जब मौनी अमावस्या के अवसर पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की पालकी के साथ शोभायात्रा को संगम नोज तक जाने से रोक दिया गया। इस दौरान साधु-संतों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की हुई, जिसमें कई संतों के घायल होने की खबरें सामने आईं।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने यूपी सरकार को भेजा कानूनी नोटिस
मेला प्रशासन के नोटिस के जवाब में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने उत्तर प्रदेश सरकार को अपने अधिवक्ता के माध्यम से कानूनी नोटिस भेजा है। नोटिस में कहा गया है कि यदि 19 जनवरी को जारी पत्र 24 घंटे में वापस नहीं लिया गया, तो सरकार और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ अदालत की अवमानना सहित अन्य कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
प्रतिष्ठा, सम्मान और गरिमा को नुकसान का आरोप
कानूनी नोटिस में कहा गया है कि मेला प्रशासन का नोटिस उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा, धार्मिक सम्मान और आर्थिक स्रोतों को नुकसान पहुंचाने वाला है। साथ ही यह भी आरोप लगाया गया कि यह मामला पहले से ही सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है, ऐसे में प्रशासन का हस्तक्षेप न्यायालय की गरिमा को चुनौती देने जैसा है।
अवमानना न्यायालय अधिनियम के तहत कार्रवाई की चेतावनी
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की ओर से स्पष्ट किया गया है कि यदि नोटिस वापस नहीं लिया गया, तो अवमानना न्यायालय अधिनियम 1971 और संविधान के अनुच्छेद 129 के तहत कार्रवाई की जाएगी।
पुराने विवाद और जाली दस्तावेज का आरोप
इस मामले में अन्य तीन शंकराचार्यों द्वारा उठाए गए पुराने विवाद का भी जिक्र है। आरोप है कि 12 अक्टूबर 2022 को सुप्रीम कोर्ट में दायर एक अंतरिम आवेदन के साथ कथित रूप से जाली दस्तावेज लगाए गए थे, जिनके जरिए अदालत को गुमराह करने की कोशिश की गई।
द्वारका शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी सदानंद का बयान
द्वारका शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी सदानंद ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि शिखा और गंगा स्नान का अपमान बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। उन्होंने गंगा स्नान में बाधा को गौ हत्या के समान पाप बताया और इसे सत्ता का अहंकार करार दिया।
वीडियो वायरल, पुलिस पर गंभीर आरोप
घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें पुलिस द्वारा शिष्यों की जटा पकड़कर घसीटने के आरोप लगाए जा रहे हैं। इस घटना के विरोध में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अपने शिविर के बाहर धरने पर बैठ गए, जिसमें कई संत-महात्मा शामिल हुए।
शंकराचार्य कौन तय करेगा?
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने सवाल उठाया कि क्या अब प्रशासन तय करेगा कि शंकराचार्य कौन है। उन्होंने कहा कि शंकराचार्य की मान्यता शंकराचार्य परंपरा तय करती है, न कि सरकार या प्रशासन।
सुप्रीम कोर्ट तक फिर पहुंच सकता है मामला
अब सबकी नजरें उत्तर प्रदेश सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं। यदि मेला प्रशासन नोटिस वापस नहीं लेता, तो यह मामला एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच सकता है और कानूनी लड़ाई और तेज होने की संभावना है।

