डिग्री की खुशी या सिस्टम का गुस्सा?: जयपुर दीक्षांत समारोह में छात्रा का तंज बना राष्ट्रीय बहस
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जयपुर स्थित हरिदेव जोशी पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में उस वक्त माहौल अचानक बदल गया, जब एक छात्रा ने मंच से ही यूनिवर्सिटी प्रशासन पर तीखा तंज कस दिया।
डिग्री लेने पहुंची छात्रा सारा इस्माइल ने राजस्थान के उपमुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा के सामने कहा— “बेइज्जती करके इज्जत देने का बहुत-बहुत शुक्रिया।” इस बयान के बाद कार्यक्रम में कुछ समय के लिए असहज स्थिति बन गई।
क्या था पूरा विवाद?
जानकारी के मुताबिक, इस समारोह में कुल 271 छात्रों को डिग्री दी जानी थी, लेकिन कार्यक्रम के दौरान केवल गोल्ड मेडलिस्ट छात्रों को मंच पर बुलाकर सम्मानित किया जा रहा था। बाकी छात्रों को मंच पर न बुलाए जाने से नाराजगी बढ़ गई, जो आखिरकार इस विरोध के रूप में सामने आई।
छात्रा की सफाई: “यह मेरी नहीं, सबकी आवाज”
घटना के बाद वायरल वीडियो के बीच सारा इस्माइल ने सामने आकर अपनी बात रखी।
उन्होंने कहा कि: यह उनका व्यक्तिगत गुस्सा नहीं था, बल्कि सभी छात्रों और उनके माता-पिता के अपमान के खिलाफ एक सामूहिक आवाज थी, उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष का अपमान करना नहीं, बल्कि समस्या की ओर ध्यान दिलाना था |
प्रशासन को बदलना पड़ा फैसला
छात्रों के विरोध और माहौल बिगड़ने के बाद प्रशासन में हड़कंप मच गया। स्थिति को संभालने के लिए: डिप्टी सीएम और वाइस चांसलर को वापस मंच पर आना पड़ा, इसके बाद सभी छात्रों को डिग्री वितरित की गई,
सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस
इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया, जिसके बाद कई बड़े सवाल उठने लगे:
क्या छात्रों को अपनी बात रखने के लिए इतना तीखा तरीका अपनाना जरूरी हो गया है?
क्या शिक्षा संस्थानों में छात्रों की भावनाओं को नजरअंदाज किया जा रहा है?
क्या यह विरोध सही था या तरीका गलत?
लोगों की राय इस मुद्दे पर बंटी हुई है— कुछ इसे छात्र अधिकारों की आवाज बता रहे हैं, तो कुछ इसे मंच की मर्यादा के खिलाफ मान रहे हैं,
बड़ा सवाल: क्या सिस्टम सुन रहा है छात्रों की आवाज?
यह घटना सिर्फ एक विश्वविद्यालय तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र पर सवाल खड़े करती है।
जहां दीक्षांत समारोह जैसे अवसर खुशी और गर्व के प्रतीक होते हैं, वहीं इस घटना ने दिखाया कि: व्यवस्थागत खामियां, छात्रों के साथ संवाद की कमी, और सम्मानजनक व्यवहार की अपेक्षा, आज भी एक बड़ा मुद्दा है।
जयपुर का यह मामला अब एक बड़े सामाजिक और शैक्षणिक विमर्श का हिस्सा बन चुका है।
यह घटना यह सोचने पर मजबूर करती है कि—
क्या छात्रों को सुना जा रहा है?
या उन्हें अपनी बात रखने के लिए ऐसे ही सख्त कदम उठाने पड़ेंगे?




