लोकसभा में NDA सरकार को बड़ा झटका: 131वां संविधान संशोधन बिल पास नहीं हुआ

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लोकसभा में मोदी सरकार को उस समय बड़ा राजनीतिक झटका लगा जब संविधान का 131वां संशोधन विधेयक 2026 सदन में दो-तिहाई बहुमत हासिल नहीं कर सका। बिल के समर्थन में 298 वोट पड़े, जबकि 230 सांसदों ने इसके खिलाफ मतदान किया। कुल 528 सांसदों ने वोटिंग में हिस्सा लिया, जबकि बिल पारित कराने के लिए 352 मतों की आवश्यकता थी। इस तरह सरकार आवश्यक बहुमत से 54 वोट पीछे रह गई। इसे केंद्र सरकार के लिए एक बड़ी संसदीय असफलता माना जा रहा है।
क्या था 131वां संविधान संशोधन बिल?
यह विधेयक केवल सीटों की संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं था, बल्कि इसके जरिए सरकार लोकसभा की संरचना में बड़ा बदलाव करना चाहती थी। प्रस्ताव के अनुसार लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 816 या उससे अधिक की जा सकती थी। सरकार का तर्क था कि देश की आबादी बढ़ने के साथ कई संसदीय क्षेत्रों में मतदाताओं की संख्या बहुत अधिक हो गई है, जिससे एक सांसद के लिए प्रभावी प्रतिनिधित्व कठिन हो गया है।
महिला आरक्षण कानून से कैसे जुड़ा था बिल?
131वें संशोधन बिल को महिला आरक्षण कानून से भी जोड़ा गया था। केंद्र सरकार पहले ही 16 अप्रैल 2026 को नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 को अधिसूचित कर चुकी है। इस कानून के तहत संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रावधान है। हालांकि इसे लागू करने के लिए जनगणना और परिसीमन आवश्यक माना गया है।
अमित शाह ने विपक्ष पर बोला हमला
गृह मंत्री अमित शाह ने बिल पर चर्चा के दौरान विपक्ष पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि विपक्ष महिला आरक्षण के खिलाफ है और जानबूझकर भ्रम फैला रहा है। शाह ने कहा कि कुछ राजनीतिक दल उत्तर और दक्षिण भारत के बीच विवाद खड़ा करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि प्रस्तावित परिसीमन से दक्षिण भारत के राज्यों की सीटें भी बढ़ेंगी।
राहुल गांधी ने सरकार पर साधा निशाना
वोटिंग से पहले विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सरकार के इरादों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यह महिला आरक्षण बिल नहीं बल्कि देश के चुनावी नक्शे को बदलने की कोशिश है। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार इस प्रक्रिया के जरिए दलितों, आदिवासियों और पिछड़े वर्गों के अधिकारों को कमजोर करना चाहती है।
सदन में हंगामा क्यों हुआ?
बहस के दौरान राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘मैजिशियन’ कहा, जिसके बाद सदन में जोरदार हंगामा शुरू हो गया। सत्ता पक्ष के सांसदों ने इस बयान का विरोध किया। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने राहुल गांधी से माफी मांगने की मांग की। कुछ समय तक सदन में नारेबाजी और हंगामा चलता रहा।
विपक्ष की असली आपत्ति क्या है?
विपक्ष महिला आरक्षण का विरोध नहीं कर रहा है, बल्कि उसे परिसीमन से जोड़ने पर सवाल उठा रहा है। विपक्षी दलों का कहना है कि महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण मौजूदा 543 लोकसभा सीटों पर ही तुरंत दिया जा सकता है। इसके लिए नई सीटें बढ़ाने या परिसीमन का इंतजार जरूरी नहीं है।
अब सरकार के पास क्या विकल्प हैं?
131वां संशोधन बिल गिरने के बाद भी सरकार के पास कुछ विकल्प मौजूद हैं। पहला विकल्प यह है कि जनगणना और परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद 2029 या उसके बाद महिला आरक्षण लागू किया जाए। दूसरा विकल्प यह है कि मौजूदा लोकसभा सीटों पर संशोधन कर तत्काल महिला आरक्षण लागू कर दिया जाए।
राजनीतिक असर कितना बड़ा होगा?
यह पिछले 12 वर्षों में पहला मौका माना जा रहा है जब मोदी सरकार लोकसभा में किसी बड़े संवैधानिक विधेयक को पारित कराने में सफल नहीं हो सकी। विपक्ष इसे सरकार की कमजोरी के रूप में पेश करेगा, जबकि भाजपा इसे महिला आरक्षण के विरोध का मुद्दा बनाकर जनता के बीच ले जा सकती है। आने वाले चुनावों में यह मुद्दा बड़ा राजनीतिक हथियार बन सकता है।
131वें संविधान संशोधन बिल की असफलता ने महिला आरक्षण, परिसीमन, संघीय ढांचे और राजनीतिक प्रतिनिधित्व जैसे मुद्दों को फिर से राष्ट्रीय बहस के केंद्र में ला दिया है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि सरकार नया रास्ता निकालती है या यह मुद्दा चुनावी राजनीति में और अधिक गरमाता है।




