राज्यसभा में इतिहास: पहली बार मनोनीत सांसद हरिवंश बने उपसभापति

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राज्यसभा में शुक्रवार को एक ऐतिहासिक क्षण देखने को मिला, जब पहली बार किसी मनोनीत सांसद को उपसभापति पद की जिम्मेदारी सौंपी गई। हरिवंश नारायण सिंह को तीसरी बार निर्विरोध उपसभापति चुना गया। यह उपलब्धि उन्हें सदन में एक मजबूत और सर्वमान्य चेहरा साबित करती है।
पीएम मोदी ने दी शुभकामनाएं
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरिवंश नारायण सिंह को बधाई देते हुए कहा कि पूरे सदन को उन पर गहरा विश्वास है। पीएम मोदी ने उनके शांत स्वभाव, संतुलित कार्यशैली और निष्पक्ष संचालन की प्रशंसा की। उन्होंने हरिवंश के जन्मस्थान सिताब दियारा का जिक्र करते हुए कहा कि यह वही भूमि है जहां लोकनायक जयप्रकाश नारायण का जन्म हुआ था।
जेपी और चंद्रशेखर से जुड़ाव का उल्लेख
प्रधानमंत्री मोदी ने हरिवंश के वैचारिक जीवन का उल्लेख करते हुए कहा कि छात्र जीवन में वे जेपी आंदोलन से जुड़े रहे और पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के विचारों से प्रभावित रहे। यही कारण है कि उनकी राजनीति में सादगी और सिद्धांत साफ दिखाई देते हैं।
खरगे ने उठाया लोकसभा उपाध्यक्ष का मुद्दा
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने हरिवंश को बधाई देते हुए लोकसभा में सात वर्षों से खाली पड़े उपाध्यक्ष पद पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की बात करने वाली सरकार को लोकसभा में भी उपाध्यक्ष चुनना चाहिए। खरगे ने इसे संवैधानिक भावना के खिलाफ बताया।
कौन हैं हरिवंश नारायण सिंह?
हरिवंश नारायण सिंह का जन्म उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के सिताब दियारा गांव में हुआ था। उन्होंने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में एमए और पत्रकारिता की पढ़ाई की। वे लंबे समय तक पत्रकारिता से जुड़े रहे और प्रभात खबर के प्रधान संपादक के रूप में अपनी अलग पहचान बनाई।
पत्रकारिता से राजनीति तक का सफर
हरिवंश ने करीब चार दशक तक मीडिया जगत में काम किया। इसके बाद 2014 में जदयू के समर्थन से वे पहली बार राज्यसभा पहुंचे। अगस्त 2018 में वे पहली बार उपसभापति बने, फिर 2020 में दूसरी बार चुने गए और अब 2026 में तीसरी बार यह जिम्मेदारी मिली है।
तीसरी बार जीत से रचा इतिहास
हरिवंश नारायण सिंह राज्यसभा के उपसभापति पद पर लगातार तीसरी बार चुने जाने वाले चुनिंदा नेताओं में शामिल हो गए हैं। खास बात यह है कि इस बार वे मनोनीत सांसद के रूप में इस पद तक पहुंचे हैं, जो अपने आप में एक नया रिकॉर्ड है।
विपक्ष ने किया बहिष्कार
विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि उम्मीदवार चयन को लेकर उनसे कोई सार्थक चर्चा नहीं हुई। साथ ही लोकसभा उपाध्यक्ष पद रिक्त रहने को लेकर नाराजगी जताते हुए कई दलों ने चुनाव प्रक्रिया का बहिष्कार किया।
संतुलित राजनीति का चेहरा बने हरिवंश
हरिवंश नारायण सिंह की छवि एक शांत, संतुलित और संवैधानिक मर्यादाओं का पालन करने वाले नेता की रही है। यही वजह है कि सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों में उनके प्रति सम्मान का भाव दिखाई देता है।




