राजस्थान में बाल विवाह पर बड़ा प्रहार: दो साहसी घटनाएं सामने आईं

दो साहसी घटनाएं सामने आईं

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राजस्थान से बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति के खिलाफ दो प्रेरणादायक घटनाएं सामने आई हैं। कोटा में एक नाबालिग लड़की ने खुद हिम्मत दिखाते हुए अपनी शादी रुकवाई, वहीं बूंदी जिले में एक 8 वर्षीय बच्चे ने अपनी सहपाठी की शादी रुकवाकर समाज को बड़ा संदेश दिया है। इन दोनों मामलों ने साबित कर दिया कि जागरूकता और सही समय पर उठाया गया कदम जिंदगी बदल सकता है।

कोटा में नाबालिग लड़की ने खुद मांगी मदद
कोटा जिले में एक नाबालिग बच्ची ने Childline India Foundation की हेल्पलाइन पर फोन कर बताया कि उसके माता-पिता 26 अप्रैल को उसकी शादी झालावाड़ निवासी युवक से कराने जा रहे हैं। बच्ची ने कहा कि वह इस शादी के लिए तैयार नहीं है और विरोध करने पर उसके साथ मारपीट की जा रही है।
उसने भावुक अपील करते हुए कहा, "अंकल, मेरा बाल विवाह रुकवाओ, घर वाले मेरी शादी करने जा रहे हैं।"

प्रशासन तुरंत हरकत में आया
सूचना मिलते ही जिला बाल संरक्षण इकाई, बाल अधिकारिता विभाग और सृष्टि सेवा समिति की टीम सक्रिय हो गई। इसी दौरान बालिका ने दोबारा कॉल कर बताया कि वह घर छोड़कर डीसीएम रोड पर खड़ी है। टीम तुरंत मौके पर पहुंची और उसे सुरक्षित संरक्षण में लिया।
कार्रवाई में काउंसलर महिमा पांचाल, सुपरवाइजर बंटी सुमन, केस वर्कर आकाश कुमार और जिला समन्वयक भूपेंद्र सिंह शामिल रहे। इसके बाद उद्योग नगर थाने में मामला दर्ज कराया गया।

बच्ची को बालिका गृह में रखा गया
बालिका को बाल कल्याण समिति (CWC) के समक्ष पेश किया गया, जहां काउंसलिंग के बाद उसे फिलहाल सुरक्षा के मद्देनजर राजकीय बालिका गृह में अस्थायी आश्रय दिया गया है।

बूंदी में 8 साल के बच्चे ने बचाई सहपाठी की जिंदगी
राजस्थान के बूंदी जिले में एक 8 वर्षीय बच्चे ने चाइल्डलाइन 1098 पर फोन कर अपनी सहपाठी की शादी रुकवाने की अपील की। उसने अधिकारियों से कहा, "भैया/दीदी मेरी दोस्त की शादी रोक दीजिए। वह बहुत छोटी है, हम साथ पढ़ते और खेलते हैं। वह शादी नहीं करना चाहती, उसे पढ़ना है।"
बच्चे की सूचना पर टीम तुरंत मौके पर पहुंची। जांच में पता चला कि 8 वर्षीय बच्ची की शादी की तैयारी चल रही थी। साथ ही एक 16 वर्षीय किशोरी का भी विवाह कराया जा रहा था।

दोनों लड़कियों को सुरक्षित निकाला गया
पुलिस और प्रशासन की मदद से दोनों नाबालिग लड़कियों को सुरक्षित बाहर निकालकर बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश किया गया। समिति ने दोनों को अस्थायी रूप से शेल्टर होम भेजने के निर्देश दिए।

कानून के तहत बाल विवाह अपराध
भारत में बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के तहत बाल विवाह एक गंभीर दंडनीय अपराध है। लड़कियों की शादी की न्यूनतम आयु 18 वर्ष और लड़कों की 21 वर्ष तय है। नियमों का उल्लंघन करने पर 2 साल तक की जेल और ₹1 लाख तक जुर्माना हो सकता है।

प्रशासन ने बढ़ाई निगरानी
राजस्थान प्रशासन ने अक्षय तृतीया जैसे अवसरों पर बाल विवाह रोकने के लिए 24 घंटे कंट्रोल रूम, हेल्पलाइन और विशेष निगरानी तंत्र सक्रिय किया है। सामाजिक कार्यकर्ताओं और आशा कार्यकर्ताओं को भी संदिग्ध मामलों की तुरंत सूचना देने के निर्देश दिए गए हैं।

समाज के लिए बड़ा संदेश
इन दोनों घटनाओं ने यह साबित कर दिया कि उम्र छोटी हो सकती है, लेकिन सोच बड़ी हो सकती है। एक नाबालिग लड़की और एक 8 साल के बच्चे ने पूरे समाज को सिखाया है कि बच्चों का अधिकार बचपन, शिक्षा और सुरक्षित भविष्य है।

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