नेहरू: PM ही नहीं, विचारों के महान दस्तावेज़कार: 60 साल बाद क्यों तेज हुई सियासी बहस

60 साल बाद क्यों तेज हुई सियासी बहस

Comments

भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू न केवल एक कुशल राजनेता थे, बल्कि वे एक प्रखर लेखक, चिंतक और संवादकर्ता भी थे। स्वतंत्रता संग्राम के दौर से लेकर अपने 17 वर्षों के प्रधानमंत्री कार्यकाल तक नेहरू ने हजारों पत्र लिखे। ये पत्र सिर्फ निजी संवाद नहीं, बल्कि भारत के राजनीतिक, सामाजिक और वैश्विक दृष्टिकोण के जीवंत ऐतिहासिक दस्तावेज माने जाते हैं।

नेहरू की चिट्ठियों का ऐतिहासिक महत्व
नेहरू की चिट्ठियां आज भी प्रासंगिक हैं क्योंकि इनमें सांप्रदायिकता, राष्ट्रवाद, सामाजिक न्याय, लोकतंत्र और भारत की वैश्विक भूमिका जैसे मुद्दों पर उनके विचार स्पष्ट रूप से झलकते हैं। बतौर प्रधानमंत्री, गुटनिरपेक्ष आंदोलन को बढ़ावा देने में उनकी भूमिका और विश्व के कई राष्ट्राध्यक्षों व विचारकों से उनका संवाद इन पत्रों में दर्ज है।
 

51 बक्सों का विवाद कैसे शुरू हुआ?
विवाद तब गहराया जब केंद्र सरकार ने दावा किया कि नेहरू से जुड़े 51 बक्सों में भरे दस्तावेज 2008 में प्रधानमंत्री संग्रहालय और पुस्तकालय (PMML) से निकालकर सोनिया गांधी को सौंप दिए गए थे। अब मोदी सरकार इन दस्तावेजों को वापस सार्वजनिक अभिलेखागार में लाने की मांग कर रही है।

सरकार का पक्ष: निजी नहीं, राष्ट्रीय धरोहर
केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने साफ शब्दों में कहा है कि नेहरू के पत्र किसी निजी परिवार की संपत्ति नहीं हैं। उनका कहना है—
“ये भारत के पहले प्रधानमंत्री से जुड़े महत्वपूर्ण राष्ट्रीय अभिलेख हैं। ऐसे दस्तावेज बंद कमरों में नहीं, बल्कि सार्वजनिक अभिलेखागार में होने चाहिए, ताकि शोध और अध्ययन हो सके।”

‘लापता’ नहीं, ‘कब्जे’ में हैं दस्तावेज
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर मंत्री शेखावत ने उन खबरों का खंडन किया जिनमें कहा गया था कि नेहरू पेपर्स लापता हो गए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि ये दस्तावेज लापता नहीं हैं, बल्कि यह ज्ञात है कि वे किसके पास और कहां हैं।
उनका दावा है कि यूपीए सरकार के दौरान एक प्रक्रिया के तहत ये कागजात सरकारी रिकॉर्ड से हटाकर गांधी परिवार के पास चले गए।

नेहरू–एडविना माउंटबेटन की चिट्ठियां
नेहरू की सबसे चर्चित और रहस्यमयी चिट्ठियों में एडविना माउंटबेटन को लिखे गए पत्र शामिल हैं। एडविना, भारत के आखिरी ब्रिटिश वायसराय लॉर्ड माउंटबेटन की पत्नी थीं।
रिपोर्ट्स के अनुसार, इन पत्रों तक आज भी सार्वजनिक पहुंच नहीं है। एडविना की बेटी पामेला हिक्स ने अपनी किताब Daughter of Empire में लिखा है कि उनकी मां और नेहरू के बीच एक गहरा भावनात्मक और बौद्धिक रिश्ता था।

इतिहास बनाम राजनीति
आज सवाल यह नहीं है कि नेहरू की चिट्ठियां किसके पास हैं, बल्कि यह है कि क्या देश की ऐतिहासिक धरोहर पर किसी एक परिवार का अधिकार हो सकता है?
यह बहस इतिहास, पारदर्शिता और लोकतंत्र के मूल्यों से जुड़ी है। सरकार का कहना है कि जनता को अपने इतिहास को जानने और उस पर शोध करने का पूरा अधिकार है।
 

खबरे और भी है...