NCRB Report 2024: देश में अपराध घटे

Ishaan Tiwari
6 घंटे पहलेApradhi ko sakht se sakht saza milni chahiye!
Aarav Sharma
9 घंटे पहलेApradhi ko sakht se sakht saza milni chahiye!
Ananya Sharma
11 घंटे पहलेPoori detail share karein, hum aur jaanna chahte hain.
Pihu Agarwal
11 घंटे पहलेCBI ya SIT jaanch honi chahiye is mamle mein.
नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) ने अपनी बहुप्रतीक्षित ‘Crime in India 2024’ रिपोर्ट जारी कर दी है। रिपोर्ट के मुताबिक देशभर में साल 2024 के दौरान कुल 58.85 लाख अपराध दर्ज किए गए, जो वर्ष 2023 की तुलना में करीब 6 प्रतिशत कम हैं। इन मामलों में भारतीय दंड संहिता (IPC) और भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत 35.44 लाख केस जबकि विशेष और स्थानीय कानूनों (SLL) के तहत 23.41 लाख मामले शामिल हैं।
रिपोर्ट में हत्या, अपहरण और महिलाओं के खिलाफ अपराध जैसे पारंपरिक अपराधों में हल्की गिरावट दर्ज की गई है, लेकिन साइबर अपराध, बच्चों और बुजुर्गों के खिलाफ अपराधों में तेजी से बढ़ोतरी ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है।
साइबर क्राइम बना सबसे बड़ा खतरा, 17.9% की तेज बढ़ोतरी
NCRB रिपोर्ट के अनुसार साल 2024 में देशभर में साइबर अपराध के कुल 1,01,928 मामले दर्ज किए गए, जबकि 2023 में यह आंकड़ा 86,420 था। यानी एक साल में 17.9 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। साइबर अपराध की दर प्रति लाख आबादी पर 6.2 से बढ़कर 7.3 हो गई है।
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि कुल साइबर मामलों में 72.6 फीसदी यानी करीब 73,987 मामले ऑनलाइन फ्रॉड से जुड़े थे। इसके अलावा ऑनलाइन यौन शोषण के 3,190 मामले और ब्लैकमेलिंग तथा डिजिटल जबरन वसूली के 2,536 केस दर्ज किए गए। रिपोर्ट साफ संकेत देती है कि अब अपराधियों का सबसे बड़ा हथियार इंटरनेट और डिजिटल प्लेटफॉर्म बनते जा रहे हैं।
हत्या और अपहरण के मामलों में राहत
रिपोर्ट के मुताबिक देश में हत्या के मामलों में 2.4 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। वहीं अपहरण और अगवा करने के मामलों में भी 15.4 प्रतिशत की कमी आई है। महिलाओं के खिलाफ अपराधों में भी मामूली गिरावट देखी गई है।
हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि अपराध में कमी के बावजूद सामाजिक सुरक्षा को लेकर पूरी तरह संतोषजनक स्थिति नहीं कही जा सकती क्योंकि संवेदनशील वर्गों पर खतरा लगातार बढ़ रहा है।
बच्चों के खिलाफ अपराधों में बढ़ोतरी ने बढ़ाई चिंता
NCRB रिपोर्ट के अनुसार साल 2024 में बच्चों के खिलाफ अपराधों के कुल 1,87,702 मामले दर्ज किए गए, जो 2023 के 1,77,335 मामलों से करीब 5.9 फीसदी ज्यादा हैं।
उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र और तमिलनाडु जैसे राज्यों में बच्चों के खिलाफ अपराधों में तेज वृद्धि दर्ज की गई है। उत्तर प्रदेश में 22,222, बिहार में 13,349 और महाराष्ट्र में 24,171 मामले सामने आए। वहीं मध्य प्रदेश में मामूली गिरावट देखने को मिली।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि POCSO एक्ट के तहत 69,191 मामले दर्ज किए गए। इनमें बच्चों के अपहरण, जबरन शादी और मानव तस्करी से जुड़े कई गंभीर केस शामिल हैं।
बुजुर्गों के खिलाफ अपराधों में बड़ा उछाल
देश में वरिष्ठ नागरिकों के खिलाफ अपराधों में 16.9 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। मध्य प्रदेश लगातार दूसरे साल बुजुर्गों के खिलाफ अपराध के मामलों में शीर्ष पर बना हुआ है। राज्य में 2024 में 5,875 मामले दर्ज किए गए।
कर्नाटक में बुजुर्गों के खिलाफ अपराधों में सबसे ज्यादा उछाल देखने को मिला, जहां मामलों की संख्या 1,840 से बढ़कर 4,247 हो गई। तेलंगाना में भी अपराध तेजी से बढ़े, जबकि तमिलनाडु में कुछ राहत देखने को मिली।
दिल्ली में नाबालिग अपराधियों की संख्या सबसे ज्यादा
NCRB की रिपोर्ट में दिल्ली को लेकर भी चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। देश के सभी महानगरों में नाबालिगों द्वारा किए गए अपराधों की संख्या दिल्ली में सबसे अधिक रही।
साल 2024 में दिल्ली में किशोर अपराध के 2,306 मामले दर्ज किए गए, जो चेन्नई, बेंगलुरु, हैदराबाद और अहमदाबाद जैसे शहरों से कहीं ज्यादा हैं। हालांकि राजधानी में वरिष्ठ नागरिकों के खिलाफ अपराधों में पिछले वर्षों की तुलना में थोड़ी गिरावट दर्ज की गई है।
SC/ST समुदायों के खिलाफ अपराधों में कमी
रिपोर्ट के अनुसार अनुसूचित जाति (SC) समुदाय के खिलाफ अपराधों में 3.6 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। 2024 में ऐसे 55,698 मामले सामने आए, जबकि 2023 में यह आंकड़ा 57,789 था।
वहीं अनुसूचित जनजाति (ST) समुदाय के खिलाफ अपराधों में करीब 23 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।
आत्महत्या के आंकड़े भी चिंताजनक
NCRB की ADSI 2024 रिपोर्ट के अनुसार देश में 1,70,746 लोगों ने आत्महत्या की। इनमें सबसे ज्यादा संख्या किसानों, बेरोजगार युवाओं, दिहाड़ी मजदूरों, छात्रों और गृहिणियों की रही।
खेती-किसानी से जुड़े 10,546 लोगों ने आत्महत्या की, जिनमें 4,633 किसान और 5,913 कृषि मजदूर शामिल थे। वहीं 14,778 बेरोजगार, 14,488 छात्र और 22,113 गृहिणियों की आत्महत्या के मामले सामने आए।
ड्रग ओवरडोज से मौतों में 50% तक बढ़ोतरी
रिपोर्ट में नशे की वजह से होने वाली मौतों को लेकर भी गंभीर तस्वीर सामने आई है। साल 2024 में ड्रग ओवरडोज से 978 लोगों की मौत हुई, जबकि 2023 में यह आंकड़ा 650 था।
तमिलनाडु इस मामले में सबसे ऊपर रहा, जहां 313 मौतें दर्ज की गईं। इसके बाद पंजाब, मध्य प्रदेश, राजस्थान और मिजोरम का स्थान रहा।
चार्जशीट और दोषसिद्धि दर लगभग स्थिर
NCRB के आंकड़ों के मुताबिक IPC/BNS अपराधों में चार्जशीट दाखिल करने की दर 72.1 प्रतिशत रही, जो 2023 के मुकाबले थोड़ी कम है। वहीं विशेष कानूनों के तहत यह दर बढ़कर 92.7 प्रतिशत हो गई।
अदालतों में दोषसिद्धि दर IPC अपराधों में 53.3 प्रतिशत और SLL मामलों में 79.3 प्रतिशत रही।
अपराध का स्वरूप बदल रहा है
NCRB रिपोर्ट 2024 यह संकेत देती है कि देश में पारंपरिक अपराधों में भले कमी आ रही हो, लेकिन साइबर अपराध, ऑनलाइन फ्रॉड, बच्चों और बुजुर्गों के खिलाफ हिंसा तथा मानसिक तनाव से जुड़ी घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों को डिजिटल अपराधों से निपटने के लिए ज्यादा आधुनिक तकनीक और मजबूत साइबर सुरक्षा तंत्र विकसित करना होगा।







