काशी दशाश्वमेध घाट पर गूंजा राष्ट्रभक्ति का स्वर: ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की वर्षगांठ पर भारतीय सेना को समर्पित हुई भव्य गंगा आरती
Navya Nair
0 सेकंड पहलेIs niti se desh ka bhala hoga ya nahi — debate honi chahiye.
वाराणसी के प्रसिद्ध दशाश्वमेध घाट पर आयोजित विशेष गंगा आरती इस बार केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह भारतीय सेना के साहस, पराक्रम और राष्ट्रसेवा को समर्पित एक भावनात्मक आयोजन बन गई। “ऑपरेशन सिंदूर” की वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित इस विशेष आरती में हजारों श्रद्धालुओं, साधु-संतों और स्थानीय लोगों ने भाग लेकर भारतीय जवानों के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की। मां गंगा के तट पर दीपों की रोशनी, शंखनाद और डमरू की थाप के बीच पूरा वातावरण राष्ट्रभक्ति के रंग में रंगा नजर आया।
“भारत माता की जय” और “वंदे मातरम्” से गूंज उठा घाट
विशेष गंगा आरती के दौरान दशाश्वमेध घाट पर “भारत माता की जय”, “वंदे मातरम्” और “जय हिंद” के गगनभेदी नारों ने हर किसी के मन में देशप्रेम की भावना को और प्रबल कर दिया। श्रद्धालुओं ने हाथों में दीप और तिरंगा लेकर भारतीय सेना के अदम्य साहस को नमन किया। घाट पर मौजूद लोगों ने कहा कि काशी की यह भूमि हमेशा से आध्यात्म और राष्ट्रप्रेम का प्रतीक रही है और यह आयोजन उसी परंपरा का जीवंत उदाहरण है।
पहलगाम आतंकी हमले के पीड़ितों को दी गई श्रद्धांजलि
कार्यक्रम के दौरान पहलगाम आतंकी हमले में जान गंवाने वाले लोगों को श्रद्धांजलि भी अर्पित की गई। मां गंगा में दीपदान कर दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए प्रार्थना की गई। घाट पर मौजूद लोगों ने आतंकवाद के खिलाफ एकजुट होकर देश की सुरक्षा और शांति बनाए रखने का संकल्प भी लिया। इस भावुक पल ने पूरे आयोजन को और अधिक संवेदनशील बना दिया।
काशी विश्वनाथ मंदिर में देश की रक्षा के लिए विशेष प्रार्थना
विशेष गंगा आरती के साथ-साथ काशी विश्वनाथ मंदिर में भी बाबा विश्वनाथ से देश की रक्षा, सेना की शक्ति और राष्ट्र की शांति के लिए विशेष पूजा-अर्चना की गई। श्रद्धालुओं ने प्रार्थना की कि भारत सदैव सुरक्षित और शक्तिशाली बना रहे तथा भारतीय सेना हर चुनौती का साहसपूर्वक सामना करती रहे।
दीप प्रज्वलन और शंखनाद के बीच वीर जवानों को किया गया सम्मानित
गंगा आरती के दौरान वैदिक मंत्रोच्चार, दीप प्रज्वलन और शंखनाद के बीच वीर जवानों के सम्मान में विशेष आयोजन किए गए। आरती में शामिल पुजारियों ने मां गंगा के समक्ष देश के सैनिकों के लिए मंगलकामना की। श्रद्धालुओं का कहना था कि जिस धरती पर मां गंगा बहती हैं, वहां आस्था के साथ राष्ट्रभक्ति भी समान रूप से प्रवाहित होती है।
काशी ने दिया एकता और राष्ट्रप्रेम का संदेश
काशी की इस विशेष गंगा आरती ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपराएं हमेशा राष्ट्रहित और मानवता के साथ जुड़ी रही हैं। दशाश्वमेध घाट पर उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़ ने यह साबित कर दिया कि देशभक्ति केवल सीमाओं पर ही नहीं, बल्कि जन-जन के दिलों में भी जीवित है।








