शेयर बाजार में ‘अमंगल’ जारी: सेंसेक्स 1456 अंक टूटा

Vaishali shinde
7 घंटे पहलेEconomy par iska kya asar padega, sochne wali baat hai.
Sai Mehta
8 घंटे पहलेYeh decision business community ko buri tarah affect karega.
Kabir Shukla
8 घंटे पहलेMarket mein itna uthar-chadhaav, investors pareshan hain.
Aditya Verma
12 घंटे पहलेBusiness world mein yeh ek badi halachal hai.
Reyansh Joshi
12 घंटे पहलेShare market pe nazar rakhna zaroori ho gaya hai.
घरेलू शेयर बाजार में मंगलवार को भी भारी गिरावट देखने को मिली। सोमवार की बड़ी बिकवाली के बाद सप्ताह के दूसरे कारोबारी दिन भी बाजार में घबराहट का माहौल बना रहा। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 1456 अंक टूटकर 74,559.24 पर बंद हुआ, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी 436 अंक फिसलकर 23,379.55 के स्तर पर आ गया। लगातार दो दिनों में सेंसेक्स 2700 अंक से ज्यादा लुढ़क चुका है।
खुलते ही बिखर गए सेंसेक्स और निफ्टी
मंगलवार सुबह बाजार खुलते ही बिकवाली का दबाव दिखा। सेंसेक्स अपने पिछले बंद 76,015 के मुकाबले 75,688 पर खुला और कुछ ही मिनटों में 723 अंक टूटकर 75,291 तक पहुंच गया। वहीं निफ्टी भी 23,815 के पिछले बंद स्तर से गिरकर 23,722 पर खुला और फिर 23,633 तक फिसल गया। पूरे कारोबारी सत्र के दौरान बाजार में उतार-चढ़ाव और दबाव बना रहा।
आईटी सेक्टर में सबसे ज्यादा गिरावट
इस गिरावट में सबसे ज्यादा नुकसान आईटी कंपनियों को हुआ।
TCS के शेयर 3.61% टूटे,
Infosys में 3.30% गिरावट आई,
Tech Mahindra 4.40% तक फिसला,
HCL Tech में 2.30% की कमजोरी रही,
इसके अलावा UPL, Hindustan Petroleum और Coforge जैसे शेयरों में भी 3 से 4 फीसदी तक की गिरावट दर्ज की गई। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी भारी बिकवाली देखने को मिली।
पीएम मोदी की अपील से बढ़ी बाजार की चिंता
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया अपील ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। पीएम मोदी ने पश्चिम एशिया में जारी तनाव का जिक्र करते हुए लोगों से एक साल तक सोना न खरीदने और पेट्रोल-डीजल की बचत करने की अपील की थी। उन्होंने वर्क फ्रॉम होम को बढ़ावा देने की सलाह भी दी थी।
प्रधानमंत्री ने कहा था कि भारत के आसपास चल रहे युद्ध और वैश्विक संकट का असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। इसके बाद निवेशकों में यह आशंका बढ़ गई कि आने वाले समय में महंगाई और आर्थिक दबाव बढ़ सकते हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य संकट का असर
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण होर्मुज स्ट्रेट में हालात लगातार खराब हो रहे हैं। इस क्षेत्र से दुनिया के बड़े हिस्से का तेल निर्यात होता है। तनाव बढ़ने से कच्चे तेल की सप्लाई प्रभावित होने की आशंका है। ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 107 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है। तेल महंगा होने से महंगाई बढ़ने का खतरा गहरा गया है, जिसका सीधा असर शेयर बाजार पर दिखाई दे रहा है।
रुपये ने छुआ ऑल टाइम लो
शेयर बाजार की गिरावट के बीच भारतीय रुपया भी दबाव में आ गया। डॉलर के मुकाबले रुपया 95.62 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर बंद हुआ। विदेशी निवेशकों की बिकवाली और बढ़ती वैश्विक अनिश्चितता के चलते रुपये पर दबाव बना हुआ है।
निवेशकों को भारी नुकसान
मंगलवार की गिरावट से बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैप करीब ₹10 लाख करोड़ घट गया। बाजार पूंजीकरण गिरकर 458 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया। लगातार गिरावट से छोटे निवेशकों में भी डर का माहौल है।
किन सेक्टर्स में सबसे ज्यादा असर?
आईटी सेक्टर में सबसे ज्यादा गिरावट,
रियल्टी और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स भी दबाव में,
मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में तेज बिकवाली,
मेटल और ऑयल एंड गैस सेक्टर ने कुछ मजबूती दिखाई |
क्या आगे और बढ़ सकता है संकट?
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार पश्चिम एशिया में तनाव कम नहीं हुआ तो कच्चे तेल की कीमतें और बढ़ सकती हैं। इससे भारत में महंगाई, पेट्रोल-डीजल की कीमतों और विदेशी मुद्रा पर दबाव बढ़ सकता है। आने वाले दिनों में बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना जताई जा रही है।








