Border 2 Review: 29 साल बाद सनी देओल की दहाड़

29 साल बाद सनी देओल की दहाड़

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भारतीय सिनेमा के इतिहास में कुछ फिल्में केवल पर्दे तक सीमित नहीं रहतीं, बल्कि दिलों पर अपनी अमिट छाप छोड़ जाती हैं। साल 1997 में जेपी दत्ता की ‘बॉर्डर’ ऐसी ही एक फिल्म थी, जिसने लोंगेवाला की लड़ाई को देशभक्ति के प्रतीक के रूप में अमर कर दिया।
अब ठीक 29 साल बाद, उसी गौरवशाली विरासत को आगे बढ़ाने के लिए ‘बॉर्डर 2’ आज यानी 23 जनवरी 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। सवाल यही है—क्या यह फिल्म उस ऐतिहासिक एहसास को दोहरा पाती है?

बॉर्डर 2 की कहानी: तीन मोर्चे, एक लक्ष्य
‘बॉर्डर 2’ की कहानी 1971 के भारत-पाक युद्ध पर आधारित है, जहां जंग सिर्फ जमीन तक सीमित नहीं थी, बल्कि जमीन, हवा और समुद्र—तीनों मोर्चों पर लड़ी गई।
फिल्म के केंद्र में हैं:
लेफ्टिनेंट कर्नल फतेह सिंह कालेर (सनी देओल),
मेजर होशियार सिंह दहिया (वरुण धवन),
फ्लाइंग ऑफिसर निर्मलजीत सिंह सेखों (दिलजीत दोसांझ),
नेवल ऑफिसर महेंद्र रावत (अहान शेट्टी),
चारों अलग-अलग सेनाओं का प्रतिनिधित्व करते हैं, लेकिन लक्ष्य एक है—देश की रक्षा। कहानी दिखाती है कि कैसे सीमित संसाधनों के बावजूद भारतीय सेनाओं ने पाकिस्तान की हर रणनीति को नाकाम किया।

अभिनय: सनी देओल की कालजयी दहाड़
फिल्म की सबसे बड़ी ताकत सनी देओल हैं। 69 साल की उम्र में भी उनका जोश, आंखों में आग और डायलॉग डिलीवरी वही पुराना जादू पैदा करती है। फिल्म के क्रेडिट्स में लिखा आता है— “धर्मेंद्र जी का बेटा” और यह पल दर्शकों को भावुक कर देता है।
वरुण धवन ने अपने आलोचकों को अभिनय से जवाब दिया है। उनका किरदार सधा हुआ, गंभीर और प्रभावशाली है।
दिलजीत दोसांझ फिल्म की आत्मा हैं—गंभीरता और हल्के हास्य का संतुलन शानदार है।
अहान शेट्टी सीमित स्क्रीन टाइम में भी असर छोड़ते हैं और अपने पिता सुनील शेट्टी की याद दिलाते हैं।

निर्देशन और तकनीकी पक्ष
निर्देशक अनुराग सिंह ने फिल्म को बड़े स्केल पर पेश किया है।
वॉर सीन्स भव्य हैं,
सिनेमैटोग्राफी ग्रैंड है,
बैकग्राउंड स्कोर जोश भर देता है,
हालांकि, कुछ जगह VFX और टेक्निकल क्वालिटी उम्मीद से कमजोर लगती है। फिल्म कहीं-कहीं इमोशंस और स्टार पावर पर ज्यादा निर्भर दिखती है।

संगीत: इमोशंस का सहारा
‘संदेसे आते हैं’ जैसी ऐतिहासिक धुन को दोहराना आसान नहीं था, लेकिन
‘घर कब आओगे’
‘मिट्टी के बेटे’
जैसे गाने दिल को छू जाते हैं। बैकग्राउंड म्यूजिक देशभक्ति के दृश्यों में जान डाल देता है।

1997 बनाम 2026: कहां रह गई कमी?
‘बॉर्डर 2’ तकनीकी रूप से बड़ी और आधुनिक है, लेकिन 1997 वाली ‘बॉर्डर’ की मिट्टी की खुशबू और सादगी इस बार थोड़ी कम महसूस होती है। पुरानी फिल्म का ठहराव और आत्मीयता यहां एक्शन और भव्यता में कहीं दब जाती है।

‘बॉर्डर 2’ एक इमोशनल, भव्य और दमदार वॉर फिल्म है।
यह 1997 की ‘बॉर्डर’ की जगह शायद न ले पाए, लेकिन आज के दौर की बेहतरीन वॉर फिल्मों में जरूर शामिल होती है।
परिवार के साथ देखी जा सकने वाली देशभक्ति से भरपूर फिल्म

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