दादी की शादी Review: कपिल शर्मा और नीतू कपूर ने जीता दिल

कपिल शर्मा और नीतू कपूर ने जीता दिल
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Ishaan Tiwari

Ishaan Tiwari

0 सेकंड पहले

Itna bada announcement! Fans bahut excited honge.

Aditya Verma

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0 सेकंड पहले

Industry mein itna bada change pehli baar dekha.

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कॉमेडी के किंग Kapil Sharma एक बार फिर बड़े पर्दे पर लौट आए हैं और इस बार वह सिर्फ हंसाने नहीं, बल्कि दर्शकों को रिश्तों की अहमियत समझाने आए हैं। Neetu Kapoor और कपिल शर्मा स्टारर फिल्म ‘दादी की शादी’ सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। फिल्म को लेकर शुरुआत में ज्यादा उम्मीदें नहीं थीं क्योंकि इसका ट्रेलर दर्शकों को खास प्रभावित नहीं कर पाया था, लेकिन थिएटर में फिल्म देखते ही लोगों की राय पूरी तरह बदलती नजर आ रही है।
यह फिल्म सिर्फ कॉमेडी नहीं, बल्कि रिश्तों, अकेलेपन, बुजुर्गों की भावनाओं और परिवार की टूटती कड़ियों को जोड़ने वाली कहानी बनकर सामने आई है। कई दर्शक इसे अमिताभ बच्चन की मशहूर फिल्म Baghban की याद दिलाने वाली इमोशनल फैमिली ड्रामा बता रहे हैं।

 

कहानी: दादी की शादी ने मचा दिया परिवार में भूचाल
फिल्म की कहानी टोनी कालरा यानी कपिल शर्मा के किरदार के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसकी शादी नहीं हो पा रही होती। अचानक उसकी जिंदगी में खुशियां आती हैं जब उसे पता चलता है कि जिस लड़की पर उसे कॉलेज के दिनों से क्रश था, उसी के साथ उसका रिश्ता तय हो गया है। घर में सगाई की तैयारियां चल रही होती हैं कि तभी एक ऐसी खबर आती है जिससे पूरा परिवार हिल जाता है। लड़की की दादी विमला आहूजा, जो शिमला में अकेले रहती हैं, अपनी दूसरी शादी करने का फैसला कर लेती हैं।
बस यहीं से कहानी असली मोड़ लेती है। परिवार में विरोध शुरू होता है, रिश्तों में दरार आती है और सवाल उठता है कि क्या बढ़ती उम्र में इंसान को दोबारा प्यार और साथी चुनने का हक नहीं है? फिल्म इसी भावनात्मक संघर्ष को बेहद हल्के-फुल्के लेकिन असरदार अंदाज में दिखाती है।

 

फिल्म क्यों खास है?
आज के दौर में जहां ज्यादातर फिल्में सिर्फ ग्लैमर, हिंसा या ओटीटी स्टाइल कंटेंट पर फोकस करती हैं, वहीं ‘दादी की शादी’ एक साफ-सुथरी फैमिली फिल्म बनकर सामने आती है। फिल्म यह सवाल उठाती है कि क्या हम अपने माता-पिता और दादा-दादी को सिर्फ जरूरत पड़ने पर ही याद करते हैं? क्या बुजुर्गों की जिंदगी में खुश रहने का अधिकार खत्म हो जाता है? फिल्म की सबसे बड़ी ताकत इसकी सादगी है। इसमें जबरदस्ती का ड्रामा नहीं है, बल्कि छोटे-छोटे भावनात्मक पल हैं जो सीधे दिल को छूते हैं।
पहला हाफ कॉमेडी और फैमिली ड्रामे से भरपूर है, जहां कपिल शर्मा अपने सधे हुए हास्य से खूब एंटरटेन करते हैं। वहीं दूसरा हाफ ज्यादा इमोशनल हो जाता है और कई जगह दर्शकों की आंखें नम कर देता है। हालांकि फिल्म का सेकेंड हाफ थोड़ा लंबा महसूस होता है, लेकिन इसकी कहानी और भावनाएं दर्शकों को आखिर तक बांधे रखती हैं

कपिल शर्मा ने साबित किया वह सिर्फ कॉमेडियन नहीं
Kapil Sharma इस फिल्म में अपने पुराने टीवी वाले अंदाज से बिल्कुल अलग नजर आते हैं। यहां वह सिर्फ पंच मारने वाले कॉमेडियन नहीं बल्कि एक मैच्योर अभिनेता के रूप में दिखाई देते हैं। उनकी एक्टिंग में ठहराव और गंभीरता नजर आती है। कॉमिक टाइमिंग तो शानदार है ही, लेकिन भावुक दृश्यों में भी वह प्रभावित करते हैं। उनका स्टाइल, स्क्रीन प्रेजेंस और डायलॉग डिलीवरी दर्शकों को चौंकाती है। कई लोगों का मानना है कि कपिल अब बड़े पर्दे पर भी खुद को स्थापित करने में सफल हो गए हैं।

 

नीतू कपूर और आर सरथ कुमार बने फिल्म की जान
Neetu Kapoor ने विमला आहूजा के किरदार में कमाल का काम किया है। उनकी मासूमियत, भावनाएं और स्क्रीन पर मौजूदगी फिल्म को मजबूती देती है। साउथ स्टार R. Sarathkumar के साथ उनकी केमिस्ट्री बेहद खूबसूरत लगती है। दोनों कलाकारों के सीन फिल्म का सबसे मजबूत हिस्सा बनकर सामने आते हैं। Sadia Khateeb ने भी अपने किरदार में ताजगी दिखाई है। वहीं रिद्धिमा कपूर साहनी ने इस फिल्म से एक्टिंग डेब्यू किया है और उनका काम भी सराहनीय माना जा रहा है।
योगराज सिंह अपने छोटे लेकिन दमदार रोल में अलग असर छोड़ते हैं।

 

डायरेक्शन और राइटिंग ने दिल जीता
फिल्म को आशीष आर मोहन ने लिखा और डायरेक्ट किया है। उन्होंने कहानी को जरूरत से ज्यादा ड्रामेटिक नहीं बनाया, बल्कि उसे सहज और भावनात्मक रखा है। फिल्म का सबसे अच्छा पहलू यह है कि यह बिना भाषण दिए रिश्तों की अहमियत समझाती है। डायरेक्टर ने बुजुर्गों के अकेलेपन और परिवार के बदलते व्यवहार को बहुत संवेदनशील तरीके से दिखाया है।

 

म्यूजिक बना कमजोर कड़ी
जहां फिल्म की कहानी और एक्टिंग मजबूत है, वहीं इसका म्यूजिक थोड़ा कमजोर महसूस होता है। कुछ दर्शकों को गाने कहानी की रफ्तार रोकते हुए नजर आए। हालांकि शादी वाले गानों में पंजाबी माहौल और एनर्जी देखने को मिलती है।

 

क्या ‘दादी की शादी’ देखनी चाहिए?
अगर आप ऐसी फिल्में पसंद करते हैं जो हंसाने के साथ-साथ दिल को भी छू जाएं, तो ‘दादी की शादी’ आपके लिए परफेक्ट फैमिली एंटरटेनर साबित हो सकती है। यह फिल्म सिर्फ मनोरंजन नहीं करती, बल्कि रिश्तों को देखने का नजरिया भी बदलती है। फिल्म देखकर आप थिएटर से मुस्कुराते हुए बाहर निकलेंगे और शायद अपने परिवार के बारे में थोड़ा ज्यादा सोचेंगे। ‘दादी की शादी’ उन फिल्मों में शामिल हो सकती है जिन्हें परिवार के साथ बैठकर बार-बार देखा जा सके।

 

अंतिम फैसला
‘दादी की शादी’ सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि परिवार, प्यार और अपनापन का खूबसूरत एहसास है। यह हमें याद दिलाती है कि उम्र चाहे कोई भी हो, इंसान को प्यार, सम्मान और साथ की जरूरत हमेशा रहती है। कपिल शर्मा ने इस फिल्म से साबित कर दिया है कि वह सिर्फ कॉमेडी के बादशाह नहीं, बल्कि एक शानदार अभिनेता भी हैं।

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Itna bada announcement! Fans bahut excited honge.

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Industry mein itna bada change pehli baar dekha.

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