‘मर्दानी 3’ रिव्यू: खौफनाक अम्मा

खौफनाक अम्मा

Comments

30 जनवरी 2026 को रिलीज हुई बॉलीवुड एक्ट्रेस रानी मुखर्जी की मोस्ट अवेटेड फिल्म ‘मर्दानी 3’ आखिरकार सिनेमाघरों में पहुंच चुकी है। इससे पहले 23 जनवरी को रिलीज हुई सनी देओल की ‘बॉर्डर 2’ बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन कर रही है, ऐसे में ‘मर्दानी 3’ से भी बड़ी उम्मीदें है।

कहानी क्या कहती है?
फिल्म की कहानी बुलंदशहर से शुरू होती है, जहां लगातार छोटी बच्चियों के किडनैप होने की घटनाएं सामने आती हैं। मामला तब हाई-प्रोफाइल बन जाता है, जब एक बड़े अधिकारी की बेटी और उसी घर में काम करने वाले शख्स की बेटी अगवा हो जाती हैं।
जांच की कमान संभालती हैं ACP शिवानी शिवाजी रॉय (रानी मुखर्जी), जो अब NIA के साथ काम कर रही हैं। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ती है, सामने आता है एक संगठित मानव तस्करी गिरोह, जिसकी मुखिया है रहस्यमयी और खौफनाक अम्मा।
यह गिरोह केवल किडनैपिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके तार भिखारी गैंग, मेडिकल ट्रायल्स और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से जुड़े हुए हैं, जो कहानी को और भयावह बना देता है।

अभिनय
रानी मुखर्जी ने एक बार फिर साबित किया है कि शिवानी शिवाजी रॉय का किरदार उन्हीं के लिए बना है। गुस्सा, जज्बा और थकान—हर भाव में उनका कंट्रोल दिखता है, हालांकि कुछ सीन में वह जरूरत से ज्यादा लाउड नजर आती हैं।
मल्लिका प्रसाद (अम्मा) का किरदार डर पैदा करता है, लेकिन स्क्रिप्ट और डायरेक्शन उन्हें पूरी तरह चमकने का मौका नहीं देता।
जानकी बोड़ीवाला अपनी भूमिका में ईमानदार लगती हैं और टीम का अहम हिस्सा बनकर उभरती हैं।

डायरेक्शन और तकनीकी पहलू
फिल्म का निर्देशन अभिराज मीनावाला ने किया है। विषय मजबूत होने के बावजूद पेसिंग और ट्रीटमेंट कमजोर पड़ता है। सस्पेंस के कई मोड़ पहले से ही अनुमानित लगने लगते हैं। बैकग्राउंड स्कोर माहौल बनाने में मदद करता है, कैमरा वर्क ठीक है और एडिटिंग फिल्म को जरूरत से ज्यादा खींचने नहीं देती, लेकिन ओवरऑल असर औसत ही रहता है।

कमजोरियां
कहानी का ढांचा पहले के पार्ट्स जैसा,
सेकंड हाफ में जरूरत से ज्यादा फिल्मीपन,
लॉजिक कई जगह सवाल खड़े करता है,
विलेन का किरदार अंडरयूज्ड,

‘मर्दानी 3’ वर्डिक्ट
अगर आप मर्दानी फ्रेंचाइजी या रानी मुखर्जी के फैन हैं, तो फिल्म जरूर देख सकते हैं। लेकिन अगर आप फास्ट-पेस थ्रिलर, शॉकिंग ट्विस्ट और टाइट डायरेक्शन की उम्मीद कर रहे हैं, तो थोड़ी निराशा हाथ लग सकती है। कुल मिलाकर, मजबूत विषय के बावजूद फिल्म औसत अनुभव देकर रह जाती है।

खबरे और भी है...