मध्य पूर्व युद्ध का असर: होर्मुज में बाधा से भारत में LPG संकट

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मध्य पूर्व में जारी युद्ध का सीधा असर अब भारत की ऊर्जा आपूर्ति पर दिखने लगा है। होर्मुज जलडमरूमध्य में शिपिंग ट्रैफिक बाधित होने से देश के एलपीजी (LPG) आयात पर गंभीर असर पड़ा है। भारत अपनी कुल एलपीजी जरूरत का करीब 60% आयात करता है, जिसमें से 90% से अधिक आपूर्ति इसी संकरे समुद्री मार्ग से होती है।
पिछले करीब एक महीने से जारी संघर्ष के कारण कई कार्गो जहाज रास्ते में फंसे हुए हैं, जिससे घरेलू और वाणिज्यिक स्तर पर गैस की उपलब्धता प्रभावित हो रही है। इस स्थिति से निपटने के लिए सरकार ने त्वरित कदम उठाए हैं।
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने 21 मार्च 2026 को राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को 20% अतिरिक्त आवंटन की मंजूरी दी है। इसके साथ कुल कमर्शियल एलपीजी आवंटन अब 50% तक पहुंच गया है, जिसमें पहले से जारी 10% अतिरिक्त को भी शामिल किया गया है।
सरकार ने पहले घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देते हुए कमर्शियल सप्लाई सीमित की थी, लेकिन अब आपूर्ति संतुलन बनाने की दिशा में कदम तेज कर दिए गए हैं। साथ ही अमेरिका से वैकल्पिक आयात बढ़ाने और कुछ जहाजों के सफलतापूर्वक होर्मुज पार करने से स्थिति में धीरे-धीरे सुधार के संकेत मिल रहे हैं।
इस संकट के बीच सरकार ने पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) को बढ़ावा देने पर जोर दिया है। राज्यों को अतिरिक्त आवंटन पाने के लिए सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (CGD) नेटवर्क के विस्तार, अनुमतियों में तेजी, खुदाई कार्य और शुल्क में कमी जैसे कदम उठाने होंगे।
सरकारी कंपनियां बड़े शहरों में कमर्शियल उपभोक्ताओं—जैसे होटल, रेस्तरां और कैंटीन—को LPG की जगह PNG अपनाने के लिए अभियान चला रही हैं। PNG से जुड़े उपभोक्ताओं को उनकी औसत खपत का 80% तक गैस सप्लाई सुनिश्चित की जा रही है।
PNG को बढ़ावा देने के लिए आकर्षक ऑफर भी दिए जा रहे हैं। GAIL, BPCL और इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड जैसी कंपनियां नए कनेक्शन पर ₹500 तक फ्री गैस दे रही हैं। हाल के दिनों में 13,700 से अधिक नए PNG कनेक्शन जारी हुए हैं, जबकि 7,300 से ज्यादा उपभोक्ताओं ने LPG से PNG की ओर रुख किया है।
सरकार ने सभी केंद्रीय संस्थानों और कॉलोनियों को जहां संभव हो PNG अपनाने की सलाह दी है। पेट्रोलियम एंड नेचुरल गैस रेगुलेटरी बोर्ड (PNGRB) ने भी कनेक्शन प्रक्रिया को तेज करने के निर्देश दिए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम सिर्फ मौजूदा संकट से निपटने के लिए नहीं, बल्कि भविष्य में स्वच्छ और स्थायी ईंधन व्यवस्था की दिशा में भी महत्वपूर्ण है। PNG को LPG के मुकाबले अधिक सुरक्षित, सस्ता और पर्यावरण के अनुकूल माना जाता है।








