कॉमेडी शो में शवों पर टिप्पणी से घिरीं सेजल पवार: KEM अस्पताल ने बनाई जांच समिति
Pranav Srivastava
0 सेकंड पहलेHamara media aisa hi hona chahiye, sach aur saaf.
Shruti Bajpai
0 सेकंड पहलेNishpaksh patrakarita ke liye dhanyawad.
Neha Tripathi
0 सेकंड पहलेEkdum sahi aur balanced news hai yeh.
Payal jadon
0 सेकंड पहलेSach dikhane ka shukriya, aisi journalism chahiye.
Ananya Sharma
17 मिनट पहलेAcchi khabar! Positive news bhi aati rehni chahiye.
Pooja Reddy
2 घंटे पहलेKya koi aur khabar bhi aane wali hai is topic par?
किंग एडवर्ड मेमोरियल (KEM) अस्पताल की एमबीबीएस छात्रा सेजल पवार द्वारा एक कॉमेडी शो में मेडिकल शिक्षा के लिए उपयोग किए जाने वाले शवों (कैडेवर्स) को लेकर की गई टिप्पणी ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद मेडिकल समुदाय, छात्र संगठनों और आम लोगों ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए KEM अस्पताल प्रशासन ने जांच के आदेश दे दिए हैं।
कॉमेडी शो की टिप्पणी बनी विवाद की वजह
विवाद की शुरुआत उस वायरल वीडियो से हुई जिसमें सेजल पवार स्टैंडअप कॉमेडियन प्रणित मोरे के शो में मेडिकल कॉलेजों में अध्ययन के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले शवों के बारे में चर्चा करती दिखाई दे रही हैं। वीडियो में उन्होंने पुरुष शवों के निजी अंगों को लेकर मजाकिया टिप्पणी की, जिसे कई लोगों ने असंवेदनशील और अपमानजनक बताया। वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। लोगों ने इसे देहदान करने वालों और उनके परिवारों की भावनाओं का अपमान करार दिया।
KEM अस्पताल ने बनाई जांच समिति
KEM अस्पताल और सेठ जी.एस. मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. हरीश पाठक ने इस मामले पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि मृत व्यक्तियों और देहदान करने वालों के प्रति सम्मान चिकित्सा शिक्षा का मूल आधार है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस प्रकार की टिप्पणियां पूरी तरह अस्वीकार्य हैं।
डॉ. पाठक ने बताया कि मामले की जांच के लिए दो सदस्यीय समिति का गठन किया गया है। समिति की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। अस्पताल प्रशासन ने कहा है कि मेडिकल एथिक्स और मानवीय गरिमा से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
सार्वजनिक माफी मांग चुकी हैं सेजल पवार
विवाद बढ़ने के बाद सेजल पवार ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो और लिखित बयान जारी कर माफी मांगी। उन्होंने स्वीकार किया कि उनकी टिप्पणी अनुचित थी और इससे लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं। अपने बयान में उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य किसी का अपमान करना नहीं था, लेकिन वह समझती हैं कि उनके शब्दों का प्रभाव नकारात्मक रहा। उन्होंने इस घटना को अपने लिए एक महत्वपूर्ण सीख बताते हुए भविष्य में अधिक संवेदनशीलता बरतने का आश्वासन दिया।
मेडिकल छात्र संगठनों का विरोध
ऑल इंडिया मेडिकल स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AIMSA) समेत कई मेडिकल संगठनों ने इस मामले की निंदा की है। संगठन का कहना है कि देहदान करने वाले लोग चिकित्सा विज्ञान और शिक्षा के लिए अमूल्य योगदान देते हैं। ऐसे लोगों और उनके शरीरों का सम्मान करना प्रत्येक मेडिकल छात्र और डॉक्टर की नैतिक जिम्मेदारी है।
AIMSA ने सार्वजनिक माफी के साथ-साथ जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। संगठन ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से भी अपील की है कि भविष्य में इस प्रकार की सामग्री के प्रसारण को लेकर स्पष्ट दिशानिर्देश बनाए जाएं।
साइबर पुलिस भी हुई सक्रिय
मामले के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए महाराष्ट्र साइबर पुलिस ने भी शिकायत दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद कई लोगों ने कानूनी कार्रवाई की मांग की है। वहीं अस्पताल प्रशासन की जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई पर सबकी नजर बनी हुई है।
370 रुपये बिरयानी विवाद के बाद फिर चर्चा में आया शो
गौरतलब है कि कॉमेडियन प्रणित मोरे का यही शो हाल ही में ‘370 रुपये की बिरयानी’ वाले विवादित बयान के कारण भी चर्चा में आया था। उस मामले में भी सोशल मीडिया पर व्यापक आलोचना हुई थी और संबंधित व्यक्ति ने बाद में सार्वजनिक रूप से माफी मांगी थी। अब उसी शो का एक और वीडियो नए विवाद का कारण बन गया है।
मेडिकल एथिक्स पर छिड़ी बहस
इस पूरे घटनाक्रम ने मेडिकल शिक्षा में नैतिक मूल्यों, देहदान करने वालों के सम्मान और सार्वजनिक मंचों पर संवेदनशील विषयों पर टिप्पणी करने की सीमाओं को लेकर नई बहस छेड़ दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े लोगों को सार्वजनिक अभिव्यक्ति के दौरान अतिरिक्त जिम्मेदारी और संवेदनशीलता का परिचय देना चाहिए।



