मानसून सत्र से पहले उद्धव ठाकरे को बड़ा झटका: शिंदे गुट में 6 सांसदों के विलय को मंजूरीसंसद के मानसून सत्र से ठीक पहले देश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। एक ओर केंद्र सरकार ने संसद भवन एनेक्सी में सर्वदलीय बैठक बुलाकर सभी दलों से सहयोग की अपील की, वहीं दूसरी ओर लोकसभा अध्यक्ष द्वारा शिवसेना (UBT) के छह सांसदों के शिंदे गुट में विलय को मंजूरी मिलने से नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया। विपक्ष ने इस फैसले को लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताते हुए कड़ा विरोध जताया है।मानसून सत्र से पहले सर्वदलीय बैठक, सरकार ने मांगा सहयोग-संसद के आगामी मानसून सत्र को सुचारु रूप से चलाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने सभी राजनीतिक दलों की बैठक आयोजित की। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष से रचनात्मक सहयोग की अपील करते हुए कहा कि सरकार महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार है। विपक्ष ने संकेत दिए कि वह NEET-UG पेपर लीक, महंगाई, बेरोजगारी और अन्य जनहित के मुद्दों को प्रमुखता से उठाएगा। लोकसभा में बदला शक्ति संतुलन, शिंदे गुट को बड़ी बढ़त सत्र शुरू होने से पहले लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने शिवसेना (UBT) के छह सांसदों के एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में विलय को मान्यता दे दी। इसके बाद लोकसभा में शिंदे गुट की संख्या बढ़कर 13 सांसद हो गई, जबकि उद्धव ठाकरे गुट के पास अब केवल 3 सांसद रह गए हैं। इस फैसले ने महाराष्ट्र की राजनीति के साथ-साथ संसद के समीकरण भी बदल दिए हैं। विपक्ष का विरोध, अदालत जाने की तैयारी शिवसेना (UBT) ने इस निर्णय को असंवैधानिक बताते हुए कहा कि केवल विधायी दल में बहुमत होना पर्याप्त नहीं है। पार्टी का दावा है कि संगठनात्मक ढांचे और दलबदल विरोधी कानून की भावना का उल्लंघन हुआ है। सूत्रों के अनुसार, उद्धव ठाकरे गुट इस फैसले को अदालत में चुनौती देने की तैयारी कर रहा है।