“मजहब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना”: जामा मस्जिद के बाहर नेहा भारती ने पेश की इंसानियत की मिसाल

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जामा मस्जिद के बाहर नेहा भारती ने पेश की इंसानियत की मिसाल

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देश की राजधानी Delhi में स्थित ऐतिहासिक Jama Masjid के बाहर इन दिनों एक अनोखी तस्वीर देखने को मिल रही है। रमज़ान के पवित्र महीने में, इफ्तार के वक्त रोज़ेदारों के बीच एक हिंदू बेटी अपने हाथों से इफ्तारी परोसती नजर आती है।
यह बेटी हैं – Neha Bharti, जो पिछले करीब चार वर्षों से लगातार रमज़ान के दौरान जामा मस्जिद के गेट नंबर 3 के पास रोज़ेदारों की मेजबानी कर रही हैं।

चार साल से निभा रहीं हैं मोहब्बत की परंपरा
धर्म से हिंदू होने के बावजूद नेहा का मानना है कि त्योहार किसी एक समुदाय के नहीं, बल्कि सभी इंसानों के होते हैं। रमज़ान शुरू होते ही नेहा अपने दोस्तों के साथ इफ्तार की तैयारी में जुट जाती हैं। खजूर, फल, शरबत और अन्य खाद्य सामग्री रोज़ेदारों तक पहुंचाई जाती है।
उनका कहना है: “सोशल मीडिया पर धर्म को लेकर नकारात्मक खबरें आती रहती हैं। मुझे लगता था कि कुछ सकारात्मक करना चाहिए। मैं सब कुछ नहीं बदल सकती, लेकिन अपनी तरफ से एक शुरुआत जरूर कर सकती हूं।”

“हिजाब और मुस्लिम समाज से मुझे प्यार है”
नेहा खुलकर कहती हैं कि उन्हें हिजाब और मुस्लिम समाज बेहद पसंद है क्योंकि उनके अनुसार यह समाज हमेशा मदद के लिए आगे रहता है। उनकी सोच साफ है – इंसानियत ही सबसे बड़ा धर्म है।

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