दिल्ली में फिर गरमाई ‘शीशमहल 2’ राजनीति: ‘आम आदमी पार्टी’ नहीं, ‘आलीशान आदमी पार्टी’

Monika Das
0 सेकंड पहलेAcchi khabar! Positive news bhi aati rehni chahiye.
दिल्ली की राजनीति में एक बार फिर सरकारी आवास और सादगी की राजनीति को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। बीजेपी नेता और दिल्ली सरकार में मंत्री प्रवेश साहिब सिंह वर्मा ने पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर आलीशान बंगले में रहने का आरोप लगाते हुए इसे ‘शीशमहल 2’ नाम दिया। इसके साथ ही कुछ तस्वीरें भी जारी की गईं, जिनमें कथित तौर पर केजरीवाल के नए घर की झलक दिखाई गई।
हालांकि आम आदमी पार्टी ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए तस्वीरों को फर्जी और साजिश का हिस्सा बताया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि यह मुद्दा सिर्फ जनता का ध्यान असली समस्याओं से भटकाने के लिए उठाया गया है।
संजय सिंह ने दी मानहानि केस की चेतावनी
AAP के वरिष्ठ नेता संजय सिंह ने बीजेपी पर पलटवार करते हुए कहा कि प्रवेश वर्मा द्वारा जारी तस्वीरें अरविंद केजरीवाल के घर की नहीं हैं। उन्होंने कहा कि जो टीवी चैनल इन तस्वीरों को दिखा रहे हैं, उन्हें मानहानि के मुकदमे के लिए तैयार रहना चाहिए। संजय सिंह ने कहा कि बीजेपी झूठ फैलाकर जनता को भ्रमित करना चाहती है, लेकिन सच सामने आएगा।
आतिशी की खुली चुनौती- सब नेता दिखाएं अपना घर
दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी ने इस मुद्दे पर बड़ा बयान देते हुए कहा कि अगर किसी के घर की सच्चाई जाननी है तो बीजेपी नेता रेखा गुप्ता, एलजी और अरविंद केजरीवाल सभी अपने-अपने घर मीडिया और जनता के लिए खोल दें।
उन्होंने कहा कि जनता खुद तय कर लेगी कि कौन सादगी से रहता है और कौन आलीशान जीवन जी रहा है।
प्रवेश वर्मा का तीखा हमला
प्रवेश वर्मा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि अरविंद केजरीवाल ने पहले सादगी, ईमानदारी और आम आदमी की राजनीति की बात की, लेकिन अब वे राजाओं जैसी जिंदगी जी रहे हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी का नाम ‘आम आदमी पार्टी’ नहीं बल्कि ‘आलीशान आदमी पार्टी’ होना चाहिए।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कोविड संकट के दौरान जब दिल्ली की जनता परेशान थी, उस समय ‘शीशमहल’ का काम नहीं रुका।
दिल्ली चुनाव से पहले तेज हुआ सियासी हमला
विश्लेषकों का मानना है कि दिल्ली में आगामी राजनीतिक माहौल को देखते हुए बीजेपी और AAP के बीच आरोप-प्रत्यारोप और तेज होंगे। सरकारी बंगले, खर्च और सादगी की राजनीति अब चुनावी मुद्दा बनती दिख रही है। दिल्ली की जनता अब इस बहस को किस नजर से देखती है, यह आने वाले दिनों में साफ होगा।



