जसाला प्रकरण पर गरमाई सियासत: DIG कार्यालय पहुंचीं सपा सांसद इकरा हसन
Dhruv Bhatt
0 सेकंड पहलेIs maamle mein sarkari paksh kya hai?
Kunal Rao
0 सेकंड पहलेSarkar ko iske baare mein kuch karna chahiye!
Priya Iyer
1 घंटे पहलेSarkar ko iske baare mein kuch karna chahiye!
Dev Kapoor
2 घंटे पहलेIs khabar ko sahi tarike se cover kiya gaya hai.
उत्तर प्रदेश के शामली जिले के जसाला प्रकरण ने अब बड़ा राजनीतिक रूप ले लिया है। कैराना लोकसभा सीट से समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग को लेकर सहारनपुर में DIG कार्यालय पहुंचीं, जहां पुलिस और सांसद के बीच तीखी बहस होने का मामला सामने आया है। घटना के बाद पूरे इलाके में राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है।
पीड़ित परिवार के समर्थन में पहुंचीं सांसद
बताया जा रहा है कि एक युवक की हत्या के मामले में न्याय की मांग कर रहे परिवार के साथ सांसद इकरा हसन DIG कार्यालय पहुंचीं थीं। इसी दौरान पुलिस और समर्थकों के बीच बहस शुरू हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, माहौल कुछ देर के लिए तनावपूर्ण हो गया और मौके पर भारी पुलिस बल तैनात करना पड़ा।
‘हाथ मत लगाइए…’ कहकर पुलिस से भिड़ीं इकरा हसन
घटनास्थल से सामने आए वीडियो और सोशल मीडिया पोस्ट्स में सांसद इकरा हसन पुलिसकर्मियों से बहस करती दिखाई दीं। इस दौरान उन्होंने कथित तौर पर कहा, “हाथ मत लगाइए…”, जिसके बाद वहां मौजूद लोगों में नाराज़गी और बढ़ गई। आरोप है कि पुलिस उन्हें महिला थाने ले गई और कुछ समय तक वहीं बैठाए रखा गया।
समर्थकों में नाराज़गी, सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस
घटना के वायरल होते ही सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। समर्थकों का कहना है कि सांसद पीड़ित परिवार की आवाज उठाने पहुंचीं थीं और उनके साथ ऐसा व्यवहार लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। वहीं विपक्षी दलों ने भी इस पूरे घटनाक्रम को लेकर प्रदेश सरकार और प्रशासन पर निशाना साधना शुरू कर दिया है।
प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा बताया
दूसरी ओर प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि स्थिति को नियंत्रित करने और सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए गए थे। हालांकि अब तक प्रशासन की ओर से इस पूरे मामले पर विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
जसाला प्रकरण बना नया राजनीतिक मुद्दा
शामली के जसाला प्रकरण ने अब राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। सवाल उठ रहे हैं कि आखिर ऐसी कौन सी परिस्थिति बनी कि एक मौजूदा सांसद को महिला थाने में बैठाना पड़ा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा प्रदेश की राजनीति में और अधिक गरमा सकता है।
बड़ा सवाल अब भी बरकरार
अब सबसे बड़ा सवाल यही है —
क्या यह केवल सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा था,
या फिर इसके पीछे राजनीतिक दबाव काम कर रहा था?



