अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के ग्लोबल टैरिफ रद्: प्लान-B तैयार

प्लान-B तैयार
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अमेरिका की राजनीति में एक बार फिर संवैधानिक बहस तेज हो गई है। Supreme Court of the United States ने पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump द्वारा लगाए गए व्यापक ग्लोबल टैरिफ को 6-3 के बहुमत से गैरकानूनी घोषित कर दिया है। अदालत ने अपने ऐतिहासिक फैसले में कहा कि राष्ट्रपति ने 1977 के इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) का गलत इस्तेमाल किया और अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर आयात शुल्क लगाए।

कोर्ट का क्या कहना है?

मुख्य न्यायाधीश John Roberts द्वारा लिखे गए फैसले में स्पष्ट किया गया कि संविधान के अनुसार कर और शुल्क लगाने का अधिकार कांग्रेस के पास है, न कि राष्ट्रपति के पास। अदालत ने माना कि राष्ट्रीय आपातकाल का हवाला देकर दुनिया भर के देशों पर भारी टैरिफ लगाना कानूनी रूप से उचित नहीं था।

ट्रंप की तीखी प्रतिक्रिया

फैसले के समय ट्रंप व्हाइट हाउस में राज्यों के गवर्नरों के साथ वर्किंग ब्रेकफास्ट में मौजूद थे। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्होंने इस निर्णय को “शर्मनाक” और “अपमानजनक” बताया। उन्होंने यह भी दावा किया कि उनके पास पेनाल्टी शुल्कों के लिए “बैकअप प्लान” तैयार है।

सूत्रों के मुताबिक, प्रशासन को पहले से ही प्रतिकूल फैसले की आशंका थी और वैकल्पिक कानूनी रास्तों पर काम किया जा रहा था।

क्या हैं ट्रंप के विकल्प?

विशेषज्ञों का मानना है कि 1974 के ट्रेड एक्ट की धारा 301 के तहत “अनुचित व्यापार प्रथाओं” के खिलाफ टैरिफ लगाए जा सकते हैं। इसके अलावा धारा 122 के अंतर्गत सीमित अवधि के लिए अस्थायी टैरिफ लगाने का विकल्प भी मौजूद है। हालांकि इन प्रक्रियाओं में जांच और औपचारिक प्रक्रिया आवश्यक होती है।

आर्थिक प्रभाव कितना बड़ा?

इन टैरिफ से वैश्विक व्यापार में खरबों डॉलर का लेन-देन प्रभावित हुआ था। रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी सरकार ने अरबों डॉलर की राजस्व वसूली की थी। टैक्स विशेषज्ञों का अनुमान है कि व्यापार युद्ध की वजह से अमेरिकी परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ा है।

संवैधानिक टकराव फिर चर्चा में

यह फैसला राष्ट्रपति और कांग्रेस के बीच शक्तियों के संतुलन को लेकर अहम माना जा रहा है। कोर्ट ने साफ संकेत दिया कि आपातकालीन शक्तियों का दायरा असीमित नहीं है। 

अब नजर इस बात पर है कि ट्रंप का “प्लान-B” कितना प्रभावी साबित होता है और क्या प्रशासन अन्य कानूनी प्रावधानों के जरिए अपने व्यापार एजेंडे को आगे बढ़ा पाएगा।

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