नालंदा के शीतला माता मंदिर में भगदड़: 8 श्रद्धालुओं की मौत

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बिहार के नालंदा जिले के बिहारशरीफ स्थित प्रसिद्ध शीतला माता मंदिर में मंगलवार (31 मार्च) को पूजा के दौरान दर्दनाक भगदड़ मच गई। इस हादसे में कम से कम 8 श्रद्धालुओं की मौत हो गई, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए हैं।
भीड़ का दबाव बना हादसे की वजह
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, शीतलाष्टमी और मंगला मेले के चलते सुबह से ही मंदिर परिसर में हजारों श्रद्धालु मौजूद थे। भीड़ अचानक बेकाबू हो गई और अफरा-तफरी के बीच लोग एक-दूसरे पर गिरने लगे, जिससे भगदड़ की स्थिति पैदा हो गई।
परिजनों का दर्द: “अस्पताल पहुंचने से पहले ही मां ने दम तोड़ दिया”
हादसे में जान गंवाने वाली रेखा देवी के बेटे ने बताया: “मां मेला देखने गई थीं। भारी भीड़ थी। सूचना मिलने पर हम अस्पताल पहुंचे, लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी।”
घायलों का इलाज जारी, कई की हालत गंभीर
घटना में घायल श्रद्धालुओं को तुरंत स्थानीय अस्पतालों में भर्ती कराया गया, जिनमें से कई का इलाज मॉडल अस्पताल बिहारशरीफ में चल रहा है। बताया जा रहा है कि मृतकों में अधिकांश महिलाएं शामिल हैं।
प्रशासन पर लापरवाही के आरोप
घटना के बाद श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। एक श्रद्धालु ममता देवी ने बताया: “यहां हर मंगलवार भीड़ रहती है, लेकिन इस बार कोई व्यवस्था नहीं थी। यह हादसा कुप्रबंधन का नतीजा है।”
मौके पर पहुंचे अधिकारी, राहत-बचाव कार्य जारी
घटना की सूचना मिलते ही प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और राहत-बचाव कार्य शुरू किया गया।
घायलों को एंबुलेंस के जरिए अस्पताल पहुंचाया गया।
सरकार की प्रतिक्रिया
बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस घटना को बेहद दुखद बताते हुए कहा: “सरकार पीड़ित परिवारों को हर संभव सहायता दे रही है। घायलों के इलाज की समुचित व्यवस्था की गई है।”
प्राचीन आस्था का केंद्र है शीतला माता मंदिर
नालंदा के मघड़ा गांव में स्थित यह मंदिर प्राचीन और अत्यंत श्रद्धा का केंद्र माना जाता है। मान्यता है कि यहां देवी शीतला बच्चों की रक्षा करती हैं और बीमारियों से बचाती हैं। कहा जाता है कि इस स्थान का संबंध प्राचीन इतिहास और ह्वेनसांग के दौर से भी जुड़ा हुआ है।
क्या है मंदिर की विशेषता?
मंदिर में काले पत्थर की छोटी लेकिन आकर्षक प्रतिमा स्थापित है,
प्रतिमा में चार भुजाएं, कलश, झाड़ू और नीम की डाली दर्शाई गई है,
चैत्र माह के मंगलवार और नवरात्र के दौरान यहां भारी भीड़ उमड़ती है,
“बसौरा” परंपरा के तहत लोग बासी भोजन ग्रहण करते हैं,
पहले भी हो चुकी हैं ऐसी घटनाएं
यह घटना राज्य में एक महीने पहले पूर्वी चंपारण में हुए भगदड़ जैसे हालात के बाद सामने आई है, जिससे भीड़ प्रबंधन पर सवाल खड़े हो रहे हैं।





